मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई के बढ़ते दबाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसके बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गई है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली रेपो रेट बढ़ोतरी है।
RBI MPC का बड़ा फैसला
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर को MPC के फैसले की घोषणा की। छह सदस्यीय समिति ने रेपो रेट बढ़ाने के पक्ष में सर्वसम्मति से फैसला किया। इसके साथ ही RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।
क्यों बढ़ाया गया रेपो रेट?
RBI के सामने इस समय महंगाई का दबाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 फीसदी पहुंच गई, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4 फीसदी के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर रही। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव ने भी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।
होम लोन लेने वालों पर क्या पड़ेगा असर?
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर उन कर्जदारों पर पड़ सकता है, जिनका होम लोन बाहरी बेंचमार्क यानी रेपो रेट से जुड़ा हुआ है। बैंक अपनी लोन ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे होम लोन की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
उदाहरण के तौर पर, 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद ₹50 लाख के 25 साल के होम लोन पर EMI में करीब ₹817 प्रति माह तक का अंतर पड़ने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि वास्तविक असर बैंक की ब्याज दर, बाकी लोन अवधि और ग्राहक के मौजूदा ब्याज पर निर्भर करेगा।
कार और पर्सनल लोन भी हो सकते हैं महंगे
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर केवल होम लोन तक सीमित नहीं रहता। बैंकिंग सिस्टम में फंड की लागत बढ़ने पर कार लोन, पर्सनल लोन और अन्य फ्लोटिंग-रेट कर्ज की ब्याज दरों में भी बदलाव हो सकता है। इससे नए कर्जदारों के साथ-साथ मौजूदा ग्राहकों की EMI पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।
FD और बचत करने वालों के लिए क्या बदलेगा?
जहां ब्याज दर बढ़ने से कर्जदारों पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ जमा और FD पर बेहतर ब्याज मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि FD की दरें बढ़ेंगी या नहीं और कितना बदलाव होगा, यह अलग-अलग बैंकों के फैसले पर निर्भर करेगा।
अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी मजबूत
RBI का फैसला ऐसे समय आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जो RBI के 7 फीसदी के अनुमान से अधिक है। मजबूत आर्थिक गतिविधियों के बीच केंद्रीय बैंक को महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दर बढ़ाने की गुंजाइश मिली है।
करीब साढ़े तीन साल बाद बढ़ी दर
RBI ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाई थी। इसके बाद लंबे समय तक दरों में स्थिरता रही और 2025 में कटौती का दौर भी चला। अब 25 बेसिस पॉइंट की नई बढ़ोतरी के साथ रेपो रेट 5.50 फीसदी हो गई है।