नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि यह कहीं भी नहीं लिखा है कि संसद का उद्घाटन कौन करेगा। यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए संसद भवन का उद्घाटन करने जा रहे हैं तो वे भी संसद सदस्य हैं। प्रधानमंत्री संसद के नेता भी हैं, इसलिए मुझे लगता है कि इस मामले में दलगत राजनीति नहीं करना चाहिए और समारोह में सभी दलों को आना चाहिए। विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर नए संसद परिसर का स्वागत करना चाहिए।
महाजन ने राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह की उस टिप्पणी पर भी राय व्यक्त की, जिसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नई संसद का उद्घाटन नहीं किया जाना अनुच्छेद-79 का उल्लंघन है। महाजन ने कहा कि अगर किसी अनुच्छेद का उल्लंघन होता है, तो उच्चतम न्यायालय देखेगा। हमारे लोकतंत्र में हर चीज की सुविधा है। सभी को अधिकार दिया गया है और नियम लिखे हुए हैं। यह कहीं नहीं लिखा है कि संसद का उद्घाटन कौन करेगा।
पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने कहा कि नया संसद भवन आवश्यक था। पुराना संसद भवन एक 100 साल पुरानी इमारत थी। परिसीमन के बाद लोकसभा के सदस्य बढ़े हैं, लेकिन संसद भवन में कुर्सियां नहीं बढ़ी। सदन में जब भी शत-प्रतिशत उपस्थिति होती थी, सदस्यों को फंस-फंसकर बैठना पड़ता था। बीच में बैठे सदस्य तो निकल भी नहीं पाते थे।
उन्होंने आगे कहा कि मैं सभी राजनीतिक दलों से हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहूंगी कि कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिन्हें हमें राजनीति से ऊपर रखना होता है। नई संसद की बहुत आवश्यकता थी। जगह बहुत कम थी, लोगों को बैठने में कठिनाई होती थी। अब संख्या बढ़ रही है और सीटें भी बढ़ानी हैं।
पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने कहा कि नया संसद भवन आवश्यक था। पुराना संसद भवन एक 100 साल पुरानी इमारत थी।
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