आज रविवार को मथुरा स्थित ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। दोनों नेताओं ने आराध्य ठाकुर बांके बिहारी के चरणों में शीश नवाकर आस्था और श्रद्धा व्यक्त की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न इस पूजा-अर्चना ने ब्रजभूमि के आध्यात्मिक वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।
मंत्रोच्चार, दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पण
दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने ठाकुर जी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया और पुष्प अर्पित किए। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रों और भक्तिमय वातावरण के बीच यह दृश्य सत्ता और साधना के समन्वय का प्रतीक बना। सेवायतों द्वारा विधिवत पूजा संपन्न कराई गई, जिसके उपरांत दोनों नेताओं को प्रसाद भी प्रदान किया गया।
लोकमंगल और विकसित भारत की प्रार्थना
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ठाकुर बांके बिहारी से उत्तर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की। साथ ही ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि के लिए भी प्रार्थना की गई। यह संदेश स्पष्ट था कि आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण का भाव भी इस दर्शन-पूजन का अहम हिस्सा रहा।
ब्रजभूमि पर नितिन नवीन का पहला आगमन
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद नितिन नवीन का यह पहला उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से ब्रजभूमि आगमन था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनकी यह उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ब्रजभूमि, जो भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा का केंद्र रही है, वहां से यह संदेश गया कि पार्टी नेतृत्व आध्यात्मिक मूल्यों को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है।
वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति
इस अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री एवं भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की एकजुटता का संदेश दिया।
शोक संवेदना और मानवीय पक्ष
बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन मांट विधायक राजेश चौधरी के आवास पहुंचे। हाल ही में विधायक की माता के निधन पर दोनों नेताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी। यह दौरा केवल धार्मिक या राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का भी प्रतीक रहा।
आध्यात्मिकता और जनसेवा का संदेश
मथुरा की इस यात्रा ने यह स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में आध्यात्मिकता और जनसेवा एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। बांके बिहारी के दर्शन से लेकर शोक संवेदना तक, यह पूरा कार्यक्रम आस्था, करुणा और जिम्मेदारी के समन्वय का उदाहरण बना।
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