उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सहायक प्राध्यापकों की अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी होते ही प्रदेशभर के कॉलेजों में हड़कंप मच गया है,इस सूची में करीब 800 ऐसे प्रोफेसरों के नाम असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में दर्ज कर दिए गए हैं, जिन्हें वर्ष 2006, 2007 और 2009 में ही प्रोफेसर का पदनाम मिल चुका था।
2012 की स्थिति के आधार पर जारी हुई सूची
विभाग ने यह अंतरिम वरिष्ठता सूची 1 अप्रैल 2012 की स्थिति को आधार बनाकर विषयवार प्रकाशित की है। सूची सामने आने के बाद शिक्षकों ने पदनाम में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
उच्च पदों पर रहे अफसर भी सूची में नीचे
सूची में शामिल कई प्रोफेसर वर्तमान में या पूर्व में अतिरिक्त संचालक (एडी), विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार और कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य कर चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें सहायक प्राध्यापक दर्शाया गया है।
15 दिन में दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम वरिष्ठता सूची है। यदि किसी को इसमें त्रुटि या आपत्ति है तो वह प्रकाशन की तारीख से 15 दिनों के भीतर उचित माध्यम से आयुक्त, उच्च शिक्षा, मध्यप्रदेश को अभ्यावेदन भेज सकता है। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।
तालमेल की कमी से बन रहे विवाद
प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष ने कहा कि विभाग और राज्य शासन के बीच तालमेल की कमी के कारण ऐसी स्थिति बनी है। यदि मामला कोर्ट पहुंचा तो इससे शासन का पक्ष कमजोर हो सकता है।
Comments (0)