कोलकाता - पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बढ़ती अंदरूनी असंतोष की खबरों के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को कोलकाता स्थित अपने कालीघाट आवास पर एक अहम और आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक में उत्तर उपनगरीय क्षेत्रों और बिधाननगर नगर निगम के मेयर, चेयरमैन और पार्षदों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल ही में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों, पार्षदों के इस्तीफों और संगठन में पैदा हुए असंतोष को लेकर रणनीति तय करना था।
बगावत पर ममता का सख्त रुख
बैठक के दौरान पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी के अच्छे समय में साथ थे, वे मुश्किल हालात में दूरी बना रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे “शौक से जा सकते हैं”, लेकिन जो कार्यकर्ता बचे हैं, उन्हें पूरी एकजुटता के साथ संगठन को मजबूत करने के लिए काम करना होगा। उनका यह बयान पार्टी में चल रही अंदरूनी नाराजगी और बगावत की चर्चाओं के बीच काफी अहम माना जा रहा है।
संगठन में बड़ा फेरबदल
बैठक के दौरान संगठनात्मक स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया गया। बारसात संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाली काकोली घोष दस्तीदार की जगह पूर्व विधायक तापस चटर्जी को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस बदलाव से संगठन को फिर से मजबूत किया जा सकेगा और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा बहाल होगा।
कानूनी मदद के लिए नई समिति का गठन
इसके साथ ही पार्टी ने कानूनी मामलों को संभालने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन भी किया है। इस समिति का नेतृत्व मलय घटक और चंद्रिमा भट्टाचार्य करेंगे। इसका उद्देश्य पार्टी से जुड़े कानूनी मामलों में समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
राजनीतिक संकेत और आगे की रणनीति
टीएमसी में हो रहे इस्तीफों और असंतोष के बीच यह बैठक पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में पार्टी संगठन को मजबूत करने और असंतोष को नियंत्रित करने पर ज्यादा फोकस कर सकती है।