पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया है। दंगा, हिंसक प्रदर्शन, सामुदायिक तनाव, सड़क जाम और सरकारी संपत्ति पर हमले जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए अब सभी जिलों में जिला दंगा निरोधी दस्ते का गठन किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने बुधवार को इसकी विस्तृत कार्ययोजना जारी की है। नई व्यवस्था के तहत जिलों और अनुमंडल स्तर पर विशेष दंगा नियंत्रण इकाइयां बनाई जाएंगी। इनका सबसे बड़ा उद्देश्य किसी भी हिंसक या आकस्मिक स्थिति में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना और घटनास्थल पर जल्द से जल्द प्रशिक्षित बल उपलब्ध कराना है।
बिहार में बनेंगी दंगा निरोधी बल की 49 कंपनियां
पुलिस मुख्यालय की योजना के अनुसार पूरे राज्य में कुल 49 कंपनियों के दंगा निरोधी दस्ते बनाए जाएंगे। इनके लिए 294 वाहन उपलब्ध कराने की योजना है। प्रत्येक कंपनी में 3 प्लाटून होंगी। एक प्लाटून में कुल 47 पुलिसकर्मी होंगे। इनमें अश्रु गैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक और वायरलेस ऑपरेटर सहित अन्य प्रशिक्षित कर्मी शामिल होंगे। हर प्लाटून के साथ 2 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।
किस जिले को कितनी पुलिस फोर्स मिलेगी?
पुलिस मुख्यालय ने जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा है।
श्रेणी A
पटना को सबसे अधिक 3 कंपनियां और 18 वाहन दिए जाएंगे।
वहीं गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और बेगूसराय को 2-2 कंपनियां और 12-12 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।
श्रेणी B
नालंदा, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, वैशाली, सीतामढ़ी, सिवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, बांका, मुंगेर, जमुई और खगड़िया को एक-एक कंपनी और 6-6 वाहन मिलेंगे।
श्रेणी C
अरवल, शिवहर, बगहा, लखीसराय, शेखपुरा और नवगछिया में एक-एक प्लाटून और 2-2 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।
हिंसा की सूचना मिलते ही 20 मिनट में रवाना होगा दस्ता
नई व्यवस्था में त्वरित कार्रवाई पर खास जोर दिया गया है। किसी जिले में दंगा या हिंसक स्थिति की सूचना मिलने पर जिला नियंत्रण कक्ष तत्काल सूचना प्रसारित करेगा। इसके बाद संबंधित दंगा निरोधी दस्ता 20 मिनट के भीतर निर्धारित घटनास्थल के लिए रवाना होगा। मौके पर पहुंचने के बाद टीम वरीय पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय कर स्थिति का आकलन करेगी और परिस्थितियों के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई करेगी।
महिला पुलिसकर्मी और मेडिकल टीम भी होंगी शामिल
दंगा निरोधी दस्ते में सिर्फ सशस्त्र पुलिसकर्मी ही नहीं होंगे, बल्कि जरूरत के अनुसार अलग-अलग विशेषज्ञ टीमों को भी शामिल किया जाएगा।
इनमें:
- प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी
- चिकित्सा एवं एंबुलेंस सहायता दल
- वीडियोग्राफी और दस्तावेजीकरण के लिए कर्मी
- संचार एवं रिजर्व बल
- अश्रु गैस दस्ता
- लाठी दस्ता
- सशस्त्र पुलिस बल
- वायरलेस ऑपरेटर शामिल होंगे।
- इससे कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ घटनाओं की रिकॉर्डिंग और घायल लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
जवानों को मिलेगा खास दंगा नियंत्रण प्रशिक्षण
दंगा निरोधी दस्ते में शामिल पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक जिले के पुलिस केंद्र में एक महीने का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके लिए पुलिस निरीक्षक, सार्जेंट मेजर और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के प्रशिक्षकों का चयन किया जाएगा। चयनित प्रशिक्षकों को रैपिड एक्शन फोर्स अकादमी फॉर पब्लिक ऑर्डर, मेरठ में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके बाद ये प्रशिक्षक अपने-अपने जिलों में चयनित पुलिस अधिकारियों और जवानों को दंगा नियंत्रण की ट्रेनिंग देंगे।
हर तीन महीने में होगा रिफ्रेशर कोर्स
पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग केवल एक बार तक सीमित नहीं रहेगी। प्रत्येक प्लाटून के लिए हर तीन महीने में एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जवानों को दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और आकस्मिक कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों से निपटने के लिए लगातार तैयार रखना है।
वरिष्ठ अधिकारी करेंगे पूरी व्यवस्था की निगरानी
दंगा निरोधी बल की तैनाती, प्रशिक्षण, उपकरण, वाहन और आवास जैसी व्यवस्थाओं की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे। क्षेत्रीय स्तर पर पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) भी इस व्यवस्था की निगरानी करेंगे। पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य बिहार में किसी भी आकस्मिक कानून-व्यवस्था की स्थिति में पुलिस को तेज, प्रशिक्षित और संगठित प्रतिक्रिया बल उपलब्ध कराना है, ताकि हिंसक घटनाओं पर जल्द नियंत्रण स्थापित किया जा सके।