नई दिल्ली: चुनाव आयोग (ECI) ने कहा है कि Special Intensive Revision (SIR) जैसे अभियानों से मतदाता सूची को अपडेट करने और चुनावी प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिली है। आयोग के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद शुरुआती चुनावों की तुलना में कई राज्यों में मतदान प्रतिशत और कुल पड़े वोटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आयोग के मुताबिक, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं। इस प्रक्रिया में मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नामों को हटाने और नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने पर जोर दिया जाता है। ECI ने SIR के लिए आधिकारिक ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई है।
पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में स्वतंत्रता के बाद सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में मतदान 91.78 फीसदी और दूसरे चरण में 91.66 फीसदी रहा, जबकि दोनों चरणों को मिलाकर मतदान प्रतिशत 92.47 फीसदी रहा। इससे पहले राज्य में सबसे अधिक मतदान 2011 में 84.72 फीसदी दर्ज किया गया था। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, शुरुआती चुनावों की तुलना में राज्य में कुल मतदान करने वालों की संख्या में भी कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
असम और पुडुचेरी में भी टूटा रिकॉर्ड
असम और पुडुचेरी में भी 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान रिकॉर्ड मतदान दर्ज हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार, असम में 85.38 फीसदी और पुडुचेरी में 89.83 फीसदी मतदान हुआ। दोनों राज्यों ने अपने पिछले सर्वाधिक मतदान के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।
तमिलनाडु में भी 2026 के चुनाव में मतदान भागीदारी स्वतंत्रता के बाद के उच्चतम स्तरों में रही। चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य में मतदान प्रतिशत 84.69 फीसदी रहा, जबकि पिछला सर्वाधिक आंकड़ा 2011 में 78.29 फीसदी था।
SIR क्यों जरूरी मानता है चुनाव आयोग?
चुनाव आयोग का कहना है कि समय के साथ मतदाता सूचियों में कई तरह की गड़बड़ियां पैदा हो सकती हैं। इनमें मृत व्यक्तियों के नाम बने रहना, मतदाताओं का दूसरे स्थान पर चले जाना, डुप्लीकेट नाम और नए पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल न होना प्रमुख हैं। SIR के जरिए इन खामियों को दूर करने की कोशिश की जाती है। BLO घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करते हैं, जिससे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने में मदद मिलती है।
जनसंख्या और पलायन भी बड़ी चुनौती
ECI के अनुसार, मतदान के आंकड़ों को केवल प्रतिशत के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। बढ़ती आबादी, लोगों का एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन और बदलती जनसांख्यिकी भी चुनावी प्रक्रिया के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।
आयोग का तर्क है कि यदि मतदाता सूचियों का नियमित पुनरीक्षण नहीं किया जाए तो समय के साथ त्रुटियां बढ़ सकती हैं। इसका असर वास्तविक मतदाताओं की चुनावी भागीदारी और चुनाव प्रक्रिया में लोगों के भरोसे पर पड़ सकता है।
लोकतांत्रिक भागीदारी का संकेत
चुनाव आयोग के अनुसार, हाल के वर्षों में कई राज्यों में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत दर्ज होना लोकतांत्रिक भागीदारी के मजबूत होने का संकेत है। आयोग का मानना है कि SIR जैसे सतत पुनरीक्षण अभियान मतदाता सूची को अपडेट रखने के साथ-साथ पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी को केवल SIR का प्रत्यक्ष परिणाम मानने के बजाय इसे मतदाता जागरूकता, चुनावी परिस्थितियों और अन्य कारकों के साथ देखना जरूरी है।