नई दिल्ली - अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनी मेटा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। 29 अमेरिकी राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि उसने अपनी अंदरूनी रिसर्च में सामने आए इंस्टाग्राम के संभावित नशे जैसे प्रभाव से जुड़ी जानकारी को छिपाया। यह मामला बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चल रही बड़ी कानूनी लड़ाई का हिस्सा है।
मेटा पर क्या हैं आरोप?
कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित संघीय अदालत में मेटा के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई है। यह कानूनी प्रक्रिया करीब छह से आठ सप्ताह तक चलने की संभावना है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि मेटा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक में ऐसे फीचर्स विकसित किए, जिनका उद्देश्य युवा यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना था।
राज्यों का दावा है कि कंपनी को यह जानकारी थी कि उसके कुछ फीचर्स बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं, फिर भी उन्हें हटाने या पर्याप्त बदलाव करने की दिशा में जरूरी कदम नहीं उठाए गए।
अंदरूनी दस्तावेजों का दिया जा रहा हवाला
कैलिफोर्निया की डिप्टी अटॉर्नी जनरल मेगन ओ'नील ने अदालत में कहा कि मेटा को कथित तौर पर इन जोखिमों की जानकारी थी। अभियोजन पक्ष का कहना है कि मुकदमे के दौरान कंपनी की जांच से सामने आए आंतरिक दस्तावेज और कर्मचारियों की गवाही पेश की जाएगी। ओ'नील के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में युवा यूजर्स को प्लेटफॉर्म के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया गया था। एक अन्य दस्तावेज का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि कंपनी के भीतर किशोरों के प्लेटफॉर्म के प्रति अत्यधिक जुड़ाव और संभावित लत को लेकर चर्चा हुई थी।
13 साल से कम उम्र के बच्चों के डेटा का भी मामला
मुकदमे में मेटा पर 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से जुड़ा डेटा माता-पिता की अनुमति के बिना इकट्ठा करने का भी आरोप लगाया गया है। यह मुकदमा अक्टूबर 2023 में दायर किया गया था और इसमें कथित तौर पर संघीय तथा राज्य कानूनों के उल्लंघन की बात कही गई है। राज्यों का आरोप है कि कंपनी ने बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले माने जाने वाले फीचर्स में पर्याप्त बदलाव करने से इनकार किया और व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दी।
200 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग
मामले में मेटा पर लगाए गए आरोप साबित होते हैं तो कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। राज्यों की ओर से 200 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग की जा रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के डिजाइन और फीचर्स में ऐसे बदलाव करने की मांग भी की गई है, जिससे बच्चों और किशोरों के लिए इन्हें अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। फिलहाल अदालत में मामले की सुनवाई जारी है। मेटा पर लगे आरोपों का अंतिम फैसला अदालत की कार्यवाही और पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर होगा।