भोपाल: भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश को लेकर कई बड़े ऐलान किए। शाह ने कहा कि 2029 तक मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि वे मध्यप्रदेश को नशामुक्त करने के संकल्प के साथ आए हैं और 31 दिसंबर 2029 तक प्रदेश में नशे के लिए कोई जगह नहीं होगी।
2029 तक नशामुक्त मध्यप्रदेश का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश को नशे की समस्या से मुक्त करने के लिए गंभीरता से काम किया जाएगा। उनके मुताबिक, 2029 के बाद प्रदेश में नशे के लिए कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने इसे प्रदेश के भविष्य और युवाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया।
देश में बढ़ा दुग्ध उत्पादन
गौपालक सम्मेलन में अमित शाह ने देश के दुग्ध उत्पादन में हुई वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश में दुग्ध उत्पादन 7 करोड़ लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 25 करोड़ लीटर प्रतिदिन तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला देश बन गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का अनुमानित वार्षिक दूध उत्पादन 2024-25 में करीब 247.87 मिलियन टन रहा, जो 2020-21 में करीब 209.96 मिलियन टन था।
75 हजार नई डेयरियां बनाने की योजना
अमित शाह ने कहा कि देशभर में 75 हजार नई डेयरियां स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में मध्यप्रदेश में सबसे अधिक डेयरियां स्थापित की जाएंगी। इसका उद्देश्य पशुपालकों को डेयरी सहकारिता से जोड़ना और उनकी आय के नए अवसर तैयार करना है।
भोपाल में आयोजित सम्मेलन में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं की शुरुआत भी की जा रही है। इनमें उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की आधारशिला और भोपाल में डेयरी से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
हर गांव में गोबर का भी मिलेगा दाम
अमित शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश के गांवों में पशुपालकों को केवल दूध से ही नहीं, बल्कि गोबर से भी आर्थिक लाभ मिले, इसकी व्यवस्था तैयार की जाएगी। यानी पशुपालन से जुड़े परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
मध्यप्रदेश में दुग्ध क्रांति पर जोर
गौपालक सम्मेलन में शाह ने सहकारी डेयरी व्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में दुग्ध उत्पादकों को बोनस, गौशालाओं के लिए सहायता और गौपालक दीदियों के सम्मान समेत कई कार्यक्रम रखे गए हैं। सम्मेलन में 35 हजार से अधिक गौपालकों और डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।