उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की टनल में हुए हादसे के बाद कई दिनों से जारी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन अब पूरा हो गया है। टनल में लापता चल रहे आखिरी श्रमिक का शव भी बरामद कर लिया गया है। इससे हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। हादसे के बाद शुरुआती दिनों में पानी और मलबे के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, घटना में छत्तीसगढ़ के चार श्रमिकों की भी मौत हुई है, जबकि प्रदेश के दो श्रमिक घायल हुए हैं।
अचानक टनल में घुसा पानी और मलबा
यह हादसा 13 अगस्त 2026 को चमोली के पीपलकोटी क्षेत्र में निर्माणाधीन टनल में हुआ। अचानक पानी और मलबा टनल के भीतर पहुंचने से वहां काम कर रहे श्रमिकों के सामने मुश्किल स्थिति पैदा हो गई। घटना के बाद प्रशासन और बचाव एजेंसियों को तुरंत सक्रिय किया गया। टनल के भीतर पानी जमा होने और मलबे के कारण रेस्क्यू टीमों के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं था। पहले पानी निकालने और मलबे को हटाने का काम किया गया, जिसके बाद टनल के अंदर अलग-अलग हिस्सों में श्रमिकों की तलाश शुरू की गई।
कई दिनों तक चला सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद बचाव दलों ने लगातार कई दिनों तक अभियान चलाया। टनल के अंदर फंसे और लापता श्रमिकों की तलाश के लिए अलग-अलग एजेंसियों की टीमें मौके पर काम कर रही थीं। पानी और मलबे की स्थिति को देखते हुए रेस्क्यू टीमों को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना पड़ा। अभियान के दौरान पहले कई श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि लापता श्रमिकों की तलाश जारी रही।
आखिरी लापता श्रमिक का शव भी बरामद
कई दिनों की तलाश के बाद टनल में लापता चल रहे आखिरी श्रमिक का शव भी बरामद कर लिया गया। इसके साथ ही टनल के अंदर चलाया जा रहा सर्च ऑपरेशन समाप्त कर दिया गया। इससे पहले भी बचाव दलों ने एक-एक कर लापता श्रमिकों का पता लगाया था। 16 अगस्त की रिपोर्टों में आठ मौतों और दो लोगों के लापता होने की जानकारी थी, जिसके बाद अंतिम लापता श्रमिक की तलाश जारी थी। अब अंतिम शव मिलने के बाद अभियान को पूरा घोषित किया गया है।
छत्तीसगढ़ के चार श्रमिकों की मौत
इस हादसे में छत्तीसगढ़ के चार श्रमिकों की जान चली गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
लोकेश्वर, पिता सोन सिंह पोयम - छत्तीसगढ़
भुनेश्वर, पिता सुरेन्द्र कुमार - छत्तीसगढ़
चेतन पोयाम, पिता सोनधार पोयाम - छत्तीसगढ़
देवनाथ, पिता धनसुराम बघेल - छत्तीसगढ़
इन श्रमिकों के परिवारों के लिए हादसे की खबर बेहद दुखद है। घटना के बाद संबंधित प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों से जुड़े आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ के दो मजदूर घायल
हादसे में छत्तीसगढ़ के दो श्रमिक घायल भी हुए हैं। दी गई जानकारी के अनुसार उनकी पहचान:
सुनील दीवान, पिता संतोश दीवान, उम्र 20 वर्ष
पेन सिंह, पिता पीला सिंह, उम्र 33 वर्ष
दोनों का उपचार जारी है। हादसे से जुड़ी रिपोर्टों में पेन सिंह का भी जिक्र आया है, जिन्होंने घटना के दौरान अचानक पानी आने की स्थिति के बारे में बताया था।
टनल में फंसे श्रमिकों को निकालना बड़ी चुनौती
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर पहुंचना और पानी-मलबे को हटाना था। बचाव टीमों को लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच काम करना पड़ा। टनल के अंदर पानी का स्तर और मलबा होने के कारण सर्च अभियान की गति प्रभावित हुई। बचावकर्मियों ने उपलब्ध उपकरणों और पंपों की मदद से रास्ता साफ करने के बाद आगे बढ़कर संभावित स्थानों पर तलाश की।
प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार जुटीं
रेस्क्यू ऑपरेशन में आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार काम करती रहीं। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अभियान की निगरानी की और बचाव दलों के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी घटनास्थल पहुंचे थे और उन्होंने बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लिया था।
हादसे के बाद परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
निर्माण कार्य के दौरान हुए इस हादसे ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया है। छत्तीसगढ़ के चार श्रमिकों की मौत के बाद उनके परिवारों में शोक का माहौल है। वहीं घायल श्रमिकों के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद की जा रही है। इस तरह की घटनाएं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में चल रहे निर्माण कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े करती हैं।