उत्तर प्रदेश: मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम मर्डर केस में अब सजा के ऐलान की तारीख तय हो गई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा 14 अक्टूबर को मामले में सजा सुनाएंगे। पति सौरभ की हत्या के बाद शव को नीले ड्रम में छिपाने के आरोप में मुस्कान और साहिल 19 मार्च 2025 से मेरठ जिला जेल में बंद हैं। दोनों फिलहाल विचाराधीन बंदी हैं। सजा का ऐलान होने के बाद, दोषसिद्धि की स्थिति में, उनकी जेल स्थिति और दिनचर्या में कई बदलाव होंगे।
14 अक्टूबर को आएगा सजा पर फैसला
मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम मर्डर केस में अब अदालत के फैसले का अगला चरण सामने है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा 14 अक्टूबर को मामले में सजा का ऐलान करेंगे। इस मामले में मुस्कान और साहिल पर सौरभ की हत्या से जुड़ा आरोप है। दोनों 19 मार्च 2025 से मेरठ की जिला जेल में बंद हैं। अभी दोनों विचाराधीन बंदी के तौर पर जेल में हैं। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी ठहराए जाने की स्थिति में उन्हें सजायाफ्ता कैदी की श्रेणी में रखा जाएगा। इसके बाद जेल प्रशासन के नियमों के मुताबिक उनकी पोशाक, गिनती, काम और निगरानी में बदलाव होगा।
सजा के बाद सफेद कपड़ों में नजर आएंगे दोनों
दोषसिद्धि के बाद जेल में मुस्कान और साहिल के कपड़ों को लेकर भी नियम बदल जाएंगे। जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, सजायाफ्ता कैदियों के लिए सरकारी पोशाक पहनना अनिवार्य होता है। मुस्कान को जेल की ओर से सफेद-क्रीम रंग की साड़ी या सूट दिया जाएगा। वहीं साहिल को सफेद कुर्ता-पायजामा पहनना होगा। अभी दोनों को जेल में अपने निजी कपड़े पहनने की अनुमति है। सजा के बाद सरकारी पोशाक से उनकी जेल में अलग पहचान होगी। यह बदलाव सजा सुनाए जाने के बाद जेल नियमों के तहत लागू किया जाएगा।
नाम की जगह कैदी नंबर से होगी पहचान
सजा के बाद जेल रिकॉर्ड और रोजाना की गिनती में भी दोनों की पहचान कैदी नंबर के जरिए होगी। जानकारी के मुताबिक, मुस्कान को बैरक 12A में नया कैदी नंबर दिया जाएगा। वहीं साहिल को पुरुष बैरक में कैदी नंबर आवंटित किया जाएगा। इसके बाद सुबह और शाम होने वाली गिनती और हाजिरी इसी नंबर के आधार पर होगी। महिला कैदियों के लिए मेरठ जेल में बैरक की संख्या सीमित होने के कारण मुस्कान का बैरक बदलना आसान नहीं होगा। वहीं पुरुष बैरक में होने के कारण साहिल का बैरक बदला जा सकता है। यह प्रक्रिया सजायाफ्ता कैदी बनने के बाद जेल मैनुअल के अनुसार होगी।
14 अक्टूबर के बाद दोनों की मुलाकात पर रोक
14 अक्टूबर को कोर्ट में पेशी के दौरान मुस्कान और साहिल के एक-दूसरे को देखने का आखिरी मौका होने की बात सामने आई है। इसके बाद जेल के नियमों के अनुसार दोनों की मुलाकात नहीं हो सकेगी। दोनों के बीच न तो वैवाहिक रिश्ता है और न ही खून का संबंध है। ऐसे में जेल मैनुअल के तहत एक-दूसरे से मिलने का प्रावधान नहीं बताया गया है। महिला और पुरुष कैदियों के लिए जेल में अलग-अलग बैरक हैं। इससे पहले 21 अप्रैल और 30 सितंबर को दोनों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई थी। सजा के बाद जेल प्रशासन उनकी निगरानी और अलगाव के नियमों का पालन कराएगा।
साहिल से कराया जाएगा हार्ड वर्क, मुस्कान को बच्ची के कारण छूट
सजायाफ्ता कैदी बनने के बाद जेल में काम को लेकर भी दोनों की स्थिति अलग हो सकती है। जानकारी के मुताबिक, साहिल से जेल नियमों के तहत हार्ड वर्क कराया जाएगा। वहीं मुस्कान को उसकी छोटी बच्ची की वजह से काम से छूट मिलने की बात सामने आई है। सजायाफ्ता कैदियों की डाइट भी विचाराधीन बंदियों की तुलना में बढ़ाई जा सकती है। बताया गया है कि दोनों की डाइट करीब डेढ़ गुना की जाएगी। इसके पीछे सजायाफ्ता कैदियों से कराए जाने वाले शारीरिक श्रम को आधार बताया गया है। सजा के बाद दोनों की सुरक्षा और निगरानी भी पहले की तुलना में बढ़ाई जाएगी।
आगरा और लखनऊ जेल भेजे जाने की तैयारी
सजा के बाद दोनों को दूसरी जेल में शिफ्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। जेल नियमों के अनुसार पुरुष सजायाफ्ता कैदियों को आगरा सेंट्रल जेल और महिला कैदियों को लखनऊ नारी निकेतन भेजे जाने की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि, फिलहाल कई कैदियों का ट्रांसफर लंबित बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक करीब 300 पुरुष और 18 महिला कैदियों का स्थानांतरण अभी बाकी है। ऐसे में खाली सीट उपलब्ध होने के बाद ही मुस्कान और साहिल का नंबर आ सकता है। तब तक दोनों के मेरठ जिला जेल में रहने की संभावना है। मुस्कान की एक साल से कम उम्र की बेटी जेल मैनुअल के तहत छह साल की उम्र तक उसके साथ रह सकती है।
सजा के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकते हैं दोनों
अदालत की ओर से सजा सुनाए जाने के बाद दोनों के पास कानूनी तौर पर ऊपरी अदालत का रुख करने का विकल्प रहेगा। जानकारी के मुताबिक, सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, साहिल के भाई ने प्रयागराज हाईकोर्ट में अपील और जमानत की प्रक्रिया के लिए निजी अधिवक्ता तय किया है। वहीं मुस्कान की ओर से फिलहाल जमानत के लिए किसी वकील या परिवार के सदस्य के आगे आने की जानकारी सामने नहीं आई है। हाईकोर्ट में अपील के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी। 14 अक्टूबर के फैसले के बाद इस मामले में अगला कानूनी कदम स्पष्ट होगा।