नगीना - नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गाजियाबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। यह कार्रवाई 2018 में साहिबाबाद थाना क्षेत्र में दर्ज मारपीट और गाली-गलौज से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान उनकी गैरमौजूदगी के बाद हुई। अदालत ने मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति कुर्की से संबंधित कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
2018 के मामले में लगातार चल रही सुनवाई
यह मामला साहिबाबाद इलाके के वृंदावन गार्डन में आयोजित एक शादी समारोह से जुड़ा बताया गया है। शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार ने आरोप लगाया था कि कार्यक्रम के दौरान चंद्रशेखर आजाद और उनके साथ मौजूद लोगों से विवाद हुआ। शिकायत के मुताबिक, इसके बाद उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की गई और धमकी भी दी गई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। पुलिस इस प्रकरण में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और अब अदालत में इसकी सुनवाई चल रही है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
कोर्ट में पेशी नहीं होने पर NBW
ताजा सुनवाई के दौरान चंद्रशेखर आजाद अदालत में मौजूद नहीं थे। रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में उनकी गैरहाजिरी का मुद्दा उठाया गया और बताया गया कि इससे पहले भी उनके खिलाफ वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। गौरतलब है कि मई 2025 में भी चंद्रशेखर आजाद इसी मामले में गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए थे। उस समय उन्होंने पहले जारी वारंट को रिकॉल कराने के लिए अदालत का रुख किया था।
संपत्ति कुर्की को लेकर भी कार्रवाई
अदालत के आदेश में संपत्ति कुर्की से जुड़ी प्रक्रिया का भी उल्लेख है। रिपोर्टों के अनुसार, मामले में दंड प्रक्रिया से संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की मांग की गई थी। इन प्रावधानों में अदालत की प्रक्रिया से लगातार अनुपस्थित रहने वाले व्यक्ति के खिलाफ उद्घोषणा और संपत्ति कुर्की जैसी कार्रवाई का प्रावधान होता है।
क्या है शिकायतकर्ता का आरोप?
धर्मेंद्र कुमार का आरोप है कि 2018 में शादी समारोह के दौरान उन्होंने चंद्रशेखर आजाद से कुछ सवाल किया था। इसके बाद विवाद बढ़ा और उनके साथ मौजूद लोगों ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। शिकायत में धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था। इस मामले में पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को अभी न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
आगे क्या होगा?
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब मामले में अदालत के अगले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। चंद्रशेखर आजाद की ओर से वारंट को चुनौती देने या उसे रिकॉल कराने के लिए कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, अदालत के आदेश के अनुसार संपत्ति कुर्की से संबंधित प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है।