विशाखापट्टनम: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक बुधवार से विशाखापट्टनम के पास गुड़िलोवा स्थित ‘विज्ञान विहार’ विद्यालय में शुरू होगी। साल में एक बार होने वाली इस अहम बैठक में देश की मौजूदा परिस्थितियों और भविष्य की दिशा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक में जनसांख्यिकीय बदलाव, जनसंख्या असंतुलन, देश की वर्तमान स्थिति और भारतीय विकास मॉडल जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। इसके अलावा युवाओं को नशे की लत से दूर रखने और नशा मुक्ति के लिए प्रभावी उपायों पर भी मंथन किया जाएगा।
32 संगठनों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
बैठक में RSS प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह और अखिल भारतीय पदाधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा संघ की प्रेरणा से काम करने वाले 32 संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री, अखिल भारतीय संगठन मंत्री और चुनिंदा कार्यकर्ता भी बैठक में हिस्सा लेंगे। इन संगठनों में भाजपा, विश्व हिंदू परिषद (VHP), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), भारतीय मजदूर संघ, राष्ट्र सेविका समिति और भारतीय किसान संघ समेत अन्य संगठन शामिल हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहली बार संघ की किसी अखिल भारतीय बैठक में शामिल होंगे।
327 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद
RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने मंगलवार को बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न संगठनों से 49 महिलाओं समेत कुल 253 प्रमुख कार्यकर्ता और संघ के पदाधिकारियों को मिलाकर करीब 327 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। बैठक में विभिन्न संगठनों के बीच आपसी समन्वय को और बेहतर बनाने पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही देश और समाज से जुड़े समसामयिक विषयों पर संगठनों की भूमिका और आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
युवाओं को नशे से बचाने पर खास फोकस
बैठक में युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही आने वाले समय में संघ और उससे जुड़े संगठन इस दिशा में क्या भूमिका निभा सकते हैं, इस पर भी चर्चा होगी। नशा मुक्ति के अलावा युवाओं में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने से जुड़े विषयों पर भी विचार किया जाएगा।
‘पंच परिवर्तन’ को आगे बढ़ाने पर चर्चा
संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर तय किए गए ‘पंच परिवर्तन’ के विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के बाद इन अभियानों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए, इस पर संघ से जुड़े सभी संगठन मिलकर चर्चा करेंगे।
क्या होगा ‘भारतीय विकास मॉडल’?
सुनील आंबेकर ने कहा कि विकास के मॉडल पर लगातार चर्चा होती रही है। विकास की अवधारणा केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई सामाजिक और अन्य आयाम भी हैं। बैठक में ‘भारतीय विकास मॉडल’ की अवधारणा पर विस्तार से विचार किया जाएगा। आर्थिक विकास के साथ-साथ समाज के विभिन्न क्षेत्रों के संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए आगे की योजनाओं पर भी चर्चा होगी। इस बैठक को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं से जुड़े आंदोलन और सामाजिक मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में बैठक में हुई चर्चाओं के आधार पर संघ से जुड़े संगठनों की प्राथमिकताओं और कार्ययोजनाओं पर भी नजर रहेगी।