समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी की टीमें रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली के करीब 10 ठिकानों पर एक साथ पहुंचीं। इनमें आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट के परिसरों के अलावा सहारनपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता के घर और कार्यालय को भी शामिल बताया जा रहा है। रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी में सुबह करीब 7 बजे ED की टीम पहुंची। अधिकारियों ने परिसर में दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच शुरू की, जबकि सुरक्षा के लिए बाहर पुलिस बल तैनात किया गया। कार्रवाई के दौरान यूनिवर्सिटी में नियमित कक्षाएं भी चलती रहीं।
जौहर यूनिवर्सिटी में सुबह-सुबह पहुंची ED की टीम
बुधवार सुबह करीब 7 बजे ED की टीम जौहर यूनिवर्सिटी पहुंची। जानकारी के मुताबिक करीब 15 अधिकारी तीन वाहनों से परिसर में दाखिल हुए। टीम ने यूनिवर्सिटी से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच शुरू की। छापेमारी को देखते हुए यूनिवर्सिटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। हालांकि, कार्रवाई के दौरान शिक्षण गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हुईं। छात्रों को पहचान पत्र की जांच के बाद परिसर में प्रवेश दिया गया।
रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में एक साथ कार्रवाई
ED की कार्रवाई सिर्फ जौहर यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी की टीमें रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में करीब 10 स्थानों पर तलाशी ले रही हैं। इन परिसरों का संबंध आजम खान, जौहर यूनिवर्सिटी के ट्रस्ट और उससे जुड़े लोगों से बताया जा रहा है। सहारनपुर में CA दीपक गुप्ता के घर और कार्यालय पर भी टीम के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान जांच अधिकारी दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजात की जांच कर रहे हैं।
सरकारी ठेकों के पैसों से जुड़ा क्या है मामला?
जांच का मुख्य फोकस कथित तौर पर सरकारी ठेकों से प्राप्त धन और उसके जौहर यूनिवर्सिटी या उससे जुड़े ट्रस्ट तक पहुंचने से संबंधित है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सरकारी ठेकों से प्राप्त रकम को अलग-अलग माध्यमों से यूनिवर्सिटी या ट्रस्ट से जुड़े कार्यों में इस्तेमाल किया गया। अब ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पैसा किन व्यक्तियों, संस्थाओं या कंपनियों के माध्यम से आगे पहुंचा। हालांकि, छापेमारी के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित लेनदेन की पूरी कड़ी क्या है।
PMLA के तहत जांच की बात
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक ED की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है। PMLA का इस्तेमाल अपराध से अर्जित धन के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच और उससे जुड़ी संपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई के लिए किया जाता है। ED जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन, संपत्ति और धन के स्रोत से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर सकती है। इस कार्रवाई में अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि तलाशी के दौरान एजेंसी को कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मिले हैं।
यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर भी हो चुका है विवाद
जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में रही है। 15 जुलाई को रामपुर के जिलाधिकारी ने यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। प्रशासन की ओर से निर्माण से संबंधित नियमों और स्वीकृत नक्शे को लेकर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि बाद में मुरादाबाद के कमिश्नर आन्जनेय सिंह की अदालत ने DM के आदेश पर रोक लगा दी थी। इमारतों से जुड़ा यह मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया में है।
आजम खान के ठिकानों पर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसरों पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले भी हो चुकी है। जुलाई 2019 में ED ने यूनिवर्सिटी परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया था और जांच से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे। इसके बाद सितंबर 2023 में इनकम टैक्स विभाग और ED ने आजम खान के आवास सहित जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कई परिसरों पर कई दिनों तक कार्रवाई की थी। इसके बाद वित्तीय लेनदेन से जुड़े सवालों को लेकर ED की जांच आगे बढ़ी और समन भी जारी किए गए थे।
छापेमारी के बीच यूनिवर्सिटी में चलती रहीं कक्षाएं
ED की कार्रवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई। यूनिवर्सिटी परिसर में कक्षाएं चलती रहीं और छात्रों को ID कार्ड देखने के बाद प्रवेश दिया गया। वहीं पैरेंट्स को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें गेट से वापस भेज दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूनिवर्सिटी के आसपास पुलिस बल भी मौजूद रहा।
आजम खान के खिलाफ कितने मामले हैं?
आजम खान के खिलाफ अलग-अलग समय में 100 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। उनके वकील इमरानुल्लाह के मुताबिक, दोहरे पैन कार्ड मामले को छोड़कर अन्य मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है या वे उन मामलों में बरी हो चुके हैं। आजम खान फिलहाल दोहरे पैन कार्ड मामले में सजा के बाद जेल में हैं। उन्होंने इस मामले में जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की है।
PMLA में ED को क्या अधिकार मिलते हैं?
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच में ED को कानून के तहत कई अधिकार दिए गए हैं। जांच के दौरान एजेंसी संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए समन कर सकती है और कानूनी शर्तें पूरी होने पर परिसरों की तलाशी और दस्तावेजों की जब्ती कर सकती है। मामले की परिस्थितियों और कानूनी आधार के अनुसार अपराध से जुड़ी संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, किसी संपत्ति की अंतिम स्थिति तय करने की प्रक्रिया न्यायिक और वैधानिक प्रावधानों के तहत आगे बढ़ती है।
क्या है मनी लॉन्ड्रिंग?
मनी लॉन्ड्रिंग का सामान्य अर्थ ऐसी गतिविधियों से है जिनमें अपराध से हासिल धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने या उसे वैध दिखाने की कोशिश की जाती है। इसके लिए रकम को अलग-अलग लेनदेन, खातों, कंपनियों या संपत्तियों के माध्यम से घुमाने की कोशिश की जा सकती है। जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में पैसों के स्रोत से लेकर उसके अंतिम इस्तेमाल तक की कड़ी को ट्रैक करती हैं।
क्या होती है शेल कंपनी?
शेल कंपनी ऐसी कंपनी हो सकती है जिसका वास्तविक कारोबारी संचालन बहुत सीमित हो या जो मुख्य रूप से वित्तीय लेनदेन के लिए इस्तेमाल की जाए। सिर्फ शेल कंपनी होना अपने आप में अपराध नहीं है। समस्या तब पैदा होती है जब किसी कंपनी का इस्तेमाल गैरकानूनी तरीके से धन को छिपाने, घुमाने या उसके वास्तविक स्रोत को छुपाने के लिए किया जाता है।
शिवपाल के बयान के बाद भी गरमाई थी सियासत
आजम खान को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। 12 अगस्त को शिवपाल यादव ने रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो आजम खान को गृहमंत्री बनाया जाएगा और उनके खिलाफ हुए कथित अन्याय का जवाब दिया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना आजम खान का नाम लिए इस बयान पर पलटवार किया था। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर आजम खान के समर्थन में खड़े होने का आरोप लगाते हुए सपा की राजनीति और उनके विश्वविद्यालय से जुड़े विवादों को लेकर निशाना साधा था। इस बयानबाजी के बाद आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया था।
अब ED की जांच में क्या सामने आएगा?
बुधवार की कार्रवाई में ED का फोकस वित्तीय दस्तावेजों और कथित धन के लेनदेन की कड़ी पर बताया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि सरकारी ठेकों से जुड़े धन का वास्तविक प्रवाह क्या था और उसका इस्तेमाल किन गतिविधियों में हुआ। फिलहाल छापेमारी जारी है। तलाशी पूरी होने के बाद ED की ओर से बरामद दस्तावेजों, संपत्तियों या वित्तीय लेनदेन को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।