राजस्थान में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर कुछ इलाकों में सक्रिय होती नजर आ रही हैं। बुधवार को प्रदेश के 10 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार बारिश का यह दौर अगले तीन दिनों तक अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। वहीं टोंक स्थित बीसलपुर बांध का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है और बुधवार सुबह तक यह 314 मीटर के पार पहुंच गया। बांध में पानी की आवक बनी हुई है, हालांकि अभी यह अपनी अधिकतम भराव क्षमता से नीचे है। दूसरी ओर, राजस्थान के कई शहरों में बादल छाए रहने और उमस के बीच स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश दर्ज की गई है।
बीसलपुर बांध का जलस्तर 314.05 मीटर पहुंचा
टोंक जिले के लिए महत्वपूर्ण बीसलपुर बांध में पानी की आवक बनी हुई है। बुधवार सुबह 6 बजे दर्ज आंकड़ों के मुताबिक बांध का जलस्तर 314.05 मीटर पहुंच गया। पिछले 24 घंटे में जलस्तर में करीब 1 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं बांध में पानी की आवक से जुड़ी त्रिवेणी नदी 2.50 मीटर के स्तर पर बह रही है। बीसलपुर बांध की अधिकतम भराव क्षमता 315.50 मीटर है। ऐसे में वर्तमान जलस्तर अधिकतम क्षमता से करीब 1.45 मीटर नीचे है। मानसून के दौरान बीसलपुर बांध का जलस्तर बढ़ना जयपुर, अजमेर और टोंक समेत कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह इन इलाकों की जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ा प्रमुख जलस्रोत है।
किन इलाकों में हुई बारिश?
मंगलवार को राजस्थान के कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। करौली, सवाई माधोपुर, कोटा, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर, उदयपुर और सिरोही में बारिश की गतिविधियां देखने को मिलीं। पिछले 24 घंटे में सिरोही, चित्तौड़गढ़, कोटा, झालावाड़, बारां, सलूंबर और बांसवाड़ा में करीब 1 से 20 मिमी तक बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रतापगढ़ के अरनोद में सबसे ज्यादा 21 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा कोटा में 5.6 मिमी, डूंगरपुर में 4 मिमी और संगरिया में 3 मिमी बारिश दर्ज की गई। चित्तौड़गढ़ में भी बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि उदयपुर के डबोक में बारिश ट्रेस की गई।
अगले तीन दिन कैसा रहेगा राजस्थान का मौसम?
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक प्रदेश में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश की गतिविधियां अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रहेंगी। खासतौर पर पूर्वी राजस्थान में मानसून का प्रभाव कुछ हिस्सों में बना रह सकता है। 20 से 23 अगस्त के बीच भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं पूर्वी राजस्थान के अन्य हिस्सों में मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। कुछ स्थानों पर स्थानीय स्तर पर छिटपुट बारिश होने की संभावना बनी रहेगी। ऐसे में प्रदेश के सभी जिलों में एक जैसी बारिश की उम्मीद नहीं है।
19 से 21 अगस्त के बीच कोटा संभाग में बढ़ सकती है बारिश
कोटा संभाग में भी मौसम में बदलाव के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार 19 से 21 अगस्त के बीच कोटा संभाग में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मंगलवार को कोटा में दिनभर बादलों की आवाजाही रही। दोपहर के समय कुछ देर धूप भी निकली, लेकिन उमस और गर्मी ने लोगों को परेशान किया। यहां अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री और न्यूनतम 25.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
जयपुर में गर्मी और उमस का असर
राजधानी जयपुर में मंगलवार को मौसम बाकी कई इलाकों की तुलना में सूखा रहा। दिनभर तेज धूप के कारण गर्मी महसूस हुई और बारिश नहीं हुई। जयपुर में अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आने वाले दिनों में जयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसलिए मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
सीकर में फिलहाल मौसम रहेगा ड्राई
सीकर में मंगलवार को सुबह से ही बादलों की आवाजाही और हवा का दौर रहा। बादलों के कारण दिन में गर्मी का असर कुछ कम रहा। फतेहपुर मौसम केंद्र पर अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री और न्यूनतम 24.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में सीकर में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने का अनुमान है। बुधवार से तापमान में कुछ बढ़ोतरी भी हो सकती है।
अजमेर में उमस से परेशान लोग
अजमेर में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी दिखाई दे रही है। आसमान में बादल तो बने हुए हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण उमस और गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है। मंगलवार को भी मौसम में उतार-चढ़ाव रहा। कभी आसमान में बादल छाए तो कभी धूप निकल आई। यहां अधिकतम तापमान 31.9 डिग्री और न्यूनतम 23.6 डिग्री सेल्सियस रहा।
उदयपुर में दिनभर छाए रहे बादल
उदयपुर में मंगलवार सुबह से शाम तक बादलों की मौजूदगी रही। बीच-बीच में धूप भी दिखाई दी। तापमान की बात करें तो शहर में अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को उदयपुर का अधिकतम तापमान 29.9 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहा था।
अलवर में तेज धूप, आगे बारिश की संभावना
अलवर में मंगलवार सुबह से ही तेज धूप रही। इसके चलते गर्मी और उमस का असर महसूस किया गया। जिले में अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में यहां तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान बादल छाने और गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है।
जोधपुर में बारिश के आसार कम
पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर में मंगलवार को बादल तो छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई। यहां अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.6 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री ज्यादा रहा। मौसम विभाग के अनुसार आगामी कुछ दिनों में जोधपुर में बारिश की खास संभावना नहीं है।
राजस्थान में सबसे गर्म और सबसे ठंडा स्थान
मंगलवार को राजस्थान में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान श्रीगंगानगर में 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यानी पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में गर्मी का प्रभाव अब भी बना हुआ है। वहीं माउंट आबू 23.9 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा। इससे साफ है कि राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज काफी अलग बना हुआ है।
भरतपुर और जयपुर संभाग पर रहेगी नजर
20 से 23 अगस्त के बीच मौसम विभाग की नजर खास तौर पर भरतपुर और जयपुर संभाग पर रहेगी। इन संभागों के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। दूसरी ओर पूर्वी राजस्थान के बाकी इलाकों में मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। ऐसे में कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक स्तर पर भारी बारिश की स्थिति हर क्षेत्र में बनने की संभावना नहीं है।
राजस्थान में फिलहाल मौसम का क्या ट्रेंड है?
राजस्थान में इस समय मौसम पूरी तरह एक जैसा नहीं है। पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं, जबकि पश्चिमी जिलों में कई जगह गर्मी और उमस का असर देखने को मिल रहा है। बीसलपुर जैसे प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ना राहत की बात है, लेकिन आने वाले दिनों में बारिश का वितरण किस तरह रहता है, यह बांधों और नदियों के जलस्तर के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। बारिश के दौरान निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी। गरज-चमक के समय खुले स्थानों पर जाने से बचना भी जरूरी है।