कांगड़ा - हिमाचल प्रदेश में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव में जीत मिलने पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और चुनाव आयुक्तों को स्वीकार करते हैं, लेकिन हारने पर इन्हीं संस्थाओं को निशाना बनाने लगते हैं। ठाकुर ने कहा कि झूठ के आधार पर राजनीति करने की कोशिश करने वालों को जनता पहचान रही है। उनके मुताबिक, चुनावी नतीजों के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन गया है।
विदेशी ताकतों को लेकर भी लगाया आरोप
भाजपा सांसद ने अपने बयान में कुछ लोगों पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि ऐसे प्रयासों के जरिए भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ठाकुर ने अपने बयान में इन आरोपों के समर्थन में किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या देश का नाम नहीं लिया और न ही कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत किया। ऐसे में विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े उनके दावे को उनके राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
EVM और चुनाव आयोग पर बहस फिर चर्चा में
अनुराग ठाकुर की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, EVM और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अक्सर बहस होती रहती है। चुनाव के दौरान और नतीजों के बाद अलग-अलग दलों की ओर से चुनावी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
ठाकुर ने इस बहस में विपक्षी दलों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि बिना आधार के आरोप लगाकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश सफल नहीं होगी।
‘राजनीतिक रोटियां सेंकने’ का लगाया आरोप
भाजपा सांसद ने अपने बयान में विपक्ष के कुछ नेताओं पर बिना पर्याप्त आधार के मुद्दे उठाकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से न तो संबंधित पक्षों को राजनीतिक लाभ मिलेगा और न ही लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों को समर्थन मिलना चाहिए।
उनकी टिप्पणी से स्पष्ट है कि भाजपा इस मुद्दे पर संवैधानिक संस्थाओं के समर्थन में अपनी स्थिति रख रही है। वहीं, चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का आकलन संबंधित तथ्यों, शिकायतों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच निष्पक्ष जांच अहम
EVM, चुनाव आयोग और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दे लोकतांत्रिक व्यवस्था से सीधे जुड़े हैं। इन पर राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच जरूरी है कि किसी भी दावे की जांच तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर हो।
अनुराग ठाकुर ने अपने बयान में विपक्ष पर निशाना साधते हुए चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। हालांकि, उनके विदेशी ताकतों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अतिरिक्त साक्ष्य आवश्यक होंगे। फिलहाल, उनका बयान चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर जारी राजनीतिक बहस का हिस्सा है।