नई दिल्ली - देश में प्याज की कीमतों को लेकर राहत के संकेत मिलने लगे हैं। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से खरीफ की नई फसल की आवक बढ़ने के कारण पिछले दस दिनों में थोक कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अब महाराष्ट्र के नासिक और राजस्थान के अलवर से भी नई फसल आने की उम्मीद है। इससे आने वाले हफ्तों में प्याज की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं को राहत कितनी जल्दी मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मंडियों में घटे हुए भाव का असर खुदरा बाजार तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
लासलगांव मंडी में भी कीमतें नीचे आईं
महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी प्याज के कारोबार के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यहां एक अक्टूबर को प्याज का थोक भाव 4,450 रुपये प्रति क्विंटल था, जो दस अक्टूबर तक घटकर 3,700 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आ गया। यह गिरावट नई फसल की बढ़ती उपलब्धता का संकेत देती है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से प्याज की आवक बढ़ने के कारण उत्तर भारत के खरीदारों की महाराष्ट्र के पुराने प्याज पर निर्भरता कम हुई है। इसके चलते भंडारित प्याज की मांग पर भी दबाव पड़ा है।
खुदरा बाजार में अब भी महंगा प्याज
थोक कीमतों में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को अभी पूरी राहत नहीं मिली है। कई जगह प्याज 70 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर बिक रहा है। ऐसे में मंडियों और दुकानों के भाव के बीच अंतर उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के 126 शहरों में पिछले दो सप्ताह के दौरान प्याज की खुदरा कीमतों में एक से 21 रुपये प्रति किलो तक की कमी दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि कुछ बाजारों में राहत पहुंचनी शुरू हो गई है, लेकिन गिरावट की मात्रा शहर और स्थानीय आपूर्ति के हिसाब से अलग-अलग है।
नवंबर से पहले और बढ़ सकती है आवक
प्याज की कीमतों में आगे की गिरावट काफी हद तक नई फसल की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। राजस्थान से इस महीने के अंत तक नई फसल आने की उम्मीद है, जबकि महाराष्ट्र में नवंबर से कटाई शुरू होने की संभावना है। नासिक और अलवर से आपूर्ति बढ़ने पर बाजार में प्याज की उपलब्धता और बेहतर हो सकती है।
यदि आवक लगातार बढ़ती रही, तो नवंबर से पहले कीमतें लगभग दो महीने पहले के स्तर के करीब लौट सकती हैं। हालांकि, यह अनुमान फसल की उपलब्धता, मौसम, परिवहन और मंडियों में मांग जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।
सरकार भी बढ़ा रही प्याज की आपूर्ति
कीमतों को नियंत्रित करने और बड़े शहरों में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति तेज की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आठ कांदा एक्सप्रेस और 467 ट्रकों के माध्यम से दो लाख क्विंटल से अधिक प्याज बाजारों तक पहुंचाया गया है। अधिक खपत वाले केंद्रों में आपूर्ति बढ़ाने के लिए अतिरिक्त रेल रैक चलाने की भी योजना बनाई गई है। सरकारी बफर स्टॉक से आपूर्ति बढ़ने और नई फसल मंडियों तक पहुंचने से कीमतों को नीचे लाने में मदद मिल सकती है।
उपभोक्ताओं को राहत मिलने में कितना समय लगेगा?
आने वाले सप्ताह प्याज की कीमतों के लिहाज से अहम हो सकते हैं। नई फसल की आवक बढ़ने से थोक बाजार में नरमी जारी रहने की संभावना है, लेकिन खुदरा कीमतों में उसी अनुपात में गिरावट कब आएगी, यह स्पष्ट नहीं है।
उपभोक्ताओं के लिए वास्तविक राहत तभी महसूस होगी, जब मंडियों में सस्ता हुआ प्याज दुकानों तक भी कम कीमत पर पहुंचेगा। इसलिए आने वाले दिनों में फसल की आवक के साथ खुदरा बाजार के भाव पर भी नजर बनी रहेगी।