लखनऊ - उत्तर प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच चुनौती को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुनाव आयोग की कार्रवाई का समर्थन करते हुए विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए। वहीं, अखिलेश यादव को लेकर उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने मुख्यमंत्री की चुनौती स्वीकार की है, तो उन्हें चुनावी मैदान में आमने-सामने आना चाहिए।
SIR पर चुनाव आयोग के समर्थन में राजभर
अंबेडकर नगर में मीडिया से बातचीत के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अधिकारियों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग का समर्थन किए जाने के पीछे ठोस वजहें हैं। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में ऐसे नाम हटाए गए हैं, जिनमें मृतक मतदाताओं के नाम शामिल थे या जो लोग अपना निवास स्थान बदल चुके थे।
राजभर ने दावा किया कि कई जगहों पर एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज था। ऐसे मामलों में नामों को दुरुस्त करने के बाद मतदाता सूची में संख्या कम हुई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 14 से 20 हजार मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह आंकड़ा राजभर के दावे के रूप में सामने आया है।
विपक्ष की बयानबाजी पर उठाए सवाल
मंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण विपक्ष परेशान है। उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो वह उस सूची के आधार पर मतदान नहीं कर सकता। इसी संदर्भ में उन्होंने फर्जी मतदान की आशंकाओं का जिक्र किया।
राजभर ने चुनाव आयोग को संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि उसके खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करना उचित नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस पूरे मामले में समय के साथ स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और तथ्यों के आधार पर वास्तविकता सामने आएगी।
SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों और चुनाव आयोग की कार्रवाई के बीच यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटाने से जुड़े आंकड़ों और दावों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है।
अखिलेश यादव को जहूराबाद से चुनाव लड़ने का न्योता
ओम प्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अखिलेश यादव की ओर से दी गई चुनौती पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी है और मुख्यमंत्री ने उसे स्वीकार कर लिया है, तो अब समाजवादी पार्टी प्रमुख को पीछे नहीं हटना चाहिए।
राजभर ने अखिलेश यादव से आमने-सामने चुनाव लड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने में परेशानी है, तो वे जहूराबाद आकर चुनाव लड़ सकते हैं। राजभर ने दावा किया कि वहां उन्हें अपनी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की राजनीतिक ताकत का अंदाजा हो जाएगा।
यूपी की राजनीति में बढ़ सकती है बयानबाजी
राजभर के दोनों बयानों में चुनाव आयोग की भूमिका और विपक्ष की चुनावी चुनौती प्रमुख मुद्दे रहे। एक ओर उन्होंने SIR को मतदाता सूची दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताया, तो दूसरी ओर अखिलेश यादव को चुनावी मुकाबले के लिए खुला न्योता दिया। अब इस बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।