Zepto Free Delivery: क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto के ग्राहकों को अब फ्री डिलीवरी के लिए पहले से ज्यादा खरीदारी करनी पड़ सकती है। कंपनी ने फ्री डिलीवरी के लिए न्यूनतम ऑर्डर वैल्यू को बढ़ाकर ₹199 कर दिया है। यानी जिन ग्राहकों को पहले कम कीमत के ऑर्डर पर डिलीवरी शुल्क नहीं देना पड़ता था, उन्हें अब फ्री डिलीवरी पाने के लिए अपना कार्ट बढ़ाना होगा। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भारत की क्विक-कॉमर्स कंपनियां तेजी से बढ़ते कारोबार के साथ-साथ प्रॉफिटेबिलिटी और यूनिट इकनॉमिक्स सुधारने पर भी जोर दे रही हैं। Zepto पहले ही ₹99 से बढ़ाकर फ्री डिलीवरी की सीमा ₹149 कर चुका था और अब यह सीमा ₹199 तक पहुंच गई है। जनवरी 2026 की रिपोर्टिंग में भी Zepto की फ्री डिलीवरी सीमा ₹149 किए जाने की पुष्टि हुई थी।
₹99 से शुरू हुआ सफर, अब ₹199 तक पहुंची सीमा
Zepto ने नवंबर 2025 में अपनी फीस स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव करते हुए ₹99 से अधिक के ऑर्डर पर फ्री डिलीवरी की सुविधा शुरू की थी। उस समय कंपनी ने हैंडलिंग, सर्ज और रेन चार्ज जैसी कई फीस भी हटाई थीं। इसके बाद जनवरी 2026 में फ्री डिलीवरी की सीमा बढ़ाकर ₹149 की गई। ₹149 से कम के ऑर्डर पर करीब ₹20 डिलीवरी शुल्क लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। अब ₹199 की सीमा तक पहुंचने का मतलब है कि कुछ महीनों के भीतर फ्री डिलीवरी का न्यूनतम कार्ट वैल्यू दोगुना हो चुका है।
पीक डिमांड में ₹299 तक पहुंच सकती है सीमा?
कुछ ग्राहकों की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिक मांग वाले समय में फ्री डिलीवरी पाने के लिए जरूरी ऑर्डर वैल्यू ₹299 तक दिखाई दे सकती है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग से यह स्पष्ट नहीं है कि ₹299 की सीमा सभी ग्राहकों और सभी बाजारों के लिए Zepto की स्थायी नीति है। इसलिए ग्राहकों को अपने ऐप पर दिखाई जा रही वास्तविक फ्री-डिलीवरी सीमा को ही अंतिम मानना चाहिए। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर शुल्क और ऑफर लोकेशन, समय, ऑर्डर और ग्राहक की स्थिति के हिसाब से बदल सकते हैं।
Blinkit और Instamart के करीब पहुंचा Zepto
Zepto की नई ₹199 की सीमा उसे उसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी Blinkit के काफी करीब ले आती है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार Blinkit पर ₹199 से अधिक के ऑर्डर पर फ्री डिलीवरी की व्यवस्था रही है। वहीं Swiggy Instamart की फीस व्यवस्था अलग-अलग ग्राहक श्रेणियों और सदस्यता के आधार पर बदल सकती है। पहले भी Instamart ने ₹299 से ऊपर के ऑर्डर पर अलग-अलग फीस माफ करने की पेशकश की थी। इस तरह Zepto का नया कदम उस दौर को दिखाता है जब क्विक-कॉमर्स कंपनियों के बीच फ्री डिलीवरी और फीस को लेकर प्रतिस्पर्धा धीरे-धीरे कम होकर मुनाफे पर केंद्रित होती जा रही है।
ग्राहकों को क्या नुकसान होगा?
फ्री डिलीवरी की सीमा बढ़ने का सबसे सीधा असर छोटे ऑर्डर करने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। मान लीजिए किसी ग्राहक को सिर्फ दूध, ब्रेड या कुछ जरूरी सामान चाहिए और उसका ऑर्डर ₹120-₹150 का बनता है। पहले ऐसे ऑर्डर पर कम या कोई डिलीवरी शुल्क नहीं लगता था, लेकिन अब ₹199 की सीमा के कारण ग्राहक को या तो डिलीवरी शुल्क देना होगा या अतिरिक्त सामान कार्ट में जोड़ना पड़ेगा।
यानी ग्राहक के सामने दो विकल्प होंगे—
- जरूरत से ज्यादा सामान खरीदना
- या डिलीवरी शुल्क का भुगतान करना
- इसका असर खास तौर पर उन उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है जो क्विक-कॉमर्स ऐप का इस्तेमाल छोटे और तत्काल जरूरत वाले ऑर्डर के लिए करते हैं।
कंपनियां क्यों बढ़ा रही हैं Minimum Order Value?
क्विक-कॉमर्स कारोबार में तेज डिलीवरी की सुविधा के पीछे बड़ी लागत जुड़ी होती है। डार्क स्टोर्स, डिलीवरी पार्टनर्स, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी पर खर्च के बीच कंपनियों के लिए हर छोटे ऑर्डर को लाभदायक बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में न्यूनतम ऑर्डर वैल्यू बढ़ाने का एक उद्देश्य Average Order Value यानी AOV बढ़ाना हो सकता है। ग्राहक जब फ्री डिलीवरी के लिए तय सीमा पूरी करने की कोशिश करता है तो वह अक्सर अपने कार्ट में अतिरिक्त सामान जोड़ता है। उद्योग में इस तरह की रणनीति को प्रति ऑर्डर बेहतर इकनॉमिक्स और मार्जिन सुधारने से जोड़ा जाता रहा है। Business Standard की रिपोर्ट में भी क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा बड़े कार्ट की ओर ग्राहकों को प्रेरित करने और यूनिट इकनॉमिक्स सुधारने की रणनीति का उल्लेख किया गया था।
Zepto के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
Zepto भारत के क्विक-कॉमर्स बाजार में तेजी से विस्तार करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार DAM Capital के विश्लेषण में Zepto के प्रति स्टोर दैनिक ऑर्डर Q4FY26 में करीब 2,140 बताए गए, जबकि Blinkit के लिए 1,425 और Instamart के लिए 1,093 का आंकड़ा दिया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि Zepto के लिए फ्री-डिलीवरी सीमा को ₹199 तक बढ़ाना उसकी यूनिट इकनॉमिक्स सुधारने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इस लिहाज से ₹199 की सीमा सिर्फ ग्राहकों से अतिरिक्त पैसा लेने का मामला नहीं है, बल्कि कंपनी के बड़े कारोबारी मॉडल का हिस्सा भी हो सकती है।
क्या ग्राहकों की खरीदारी आदत बदलेगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्राहक इस बदलाव पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। क्विक-कॉमर्स की सबसे बड़ी ताकत रही है कि ग्राहक बिना लंबी खरीदारी सूची बनाए भी छोटी जरूरत का सामान कुछ ही मिनटों में मंगा सकता है। लेकिन अगर फ्री डिलीवरी के लिए कार्ट वैल्यू लगातार बढ़ती है तो ग्राहकों का व्यवहार बदल सकता है। कुछ ग्राहक ज्यादा सामान एक साथ ऑर्डर कर सकते हैं, जबकि कुछ छोटे ऑर्डर के लिए स्थानीय दुकानों या सुपरमार्केट का रुख कर सकते हैं। हालिया ऑनलाइन ग्राहक प्रतिक्रियाओं में भी कुछ उपयोगकर्ताओं ने ₹199 की नई सीमा पर असंतोष जताया है, हालांकि ये व्यक्तिगत अनुभव हैं और इन्हें पूरे ग्राहक आधार की राय नहीं माना जा सकता।
Zomato और Swiggy ने भी बढ़ाए हैं शुल्क
डिलीवरी कारोबार में फीस बढ़ाने की यह प्रवृत्ति सिर्फ क्विक-कॉमर्स तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां भी प्लेटफॉर्म और डिलीवरी शुल्क में बदलाव करती रही हैं। इसका मुख्य कारण बढ़ती परिचालन लागत के साथ कारोबार की प्रॉफिटेबिलिटी सुधारना है। कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि फीस बढ़ाते हुए ग्राहक भी प्लेटफॉर्म से जुड़े रहें। क्विक-कॉमर्स में भी अब यही संतुलन महत्वपूर्ण हो गया है—ग्राहक को तेज डिलीवरी देना और साथ ही हर ऑर्डर को ज्यादा आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना।