Deputy CM Arun Sao: छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री अरुण साव ने बुधवार को विभाग के कामकाज, निर्माणाधीन परियोजनाओं और आने वाले समय की योजनाओं को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सड़क, पुल और सरकारी भवनों के निर्माण को गति देने के लिए सरकार की ओर से बड़े स्तर पर प्रशासकीय मंजूरियां दी गई हैं। सरकार बनने के बाद से अब तक 12,666 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। अरुण साव के मुताबिक, इस समय प्रदेश में करीब 6 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण अलग-अलग चरणों में चल रहा है। इसके साथ ही पुलों और सरकारी भवनों के निर्माण पर भी काम जारी है। राजधानी रायपुर में बढ़ते यातायात को देखते हुए नई सड़कों, बायपास और फ्लाईओवर की योजनाओं को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है।
PWD में 12,666 करोड़ रुपये के कामों को मंजूरी
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि दिसंबर 2023 से अब तक लोक निर्माण विभाग में बड़ी संख्या में निर्माण कार्यों को प्रशासकीय मंजूरी दी गई है। अलग-अलग वित्तीय वर्षों में मंजूर किए गए कार्यों का आंकड़ा लगातार बढ़ा है।
विभाग के अनुसार-
दिसंबर 2023 से 2024: 551 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2024-25: 2,590 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2025-26: 9,129 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक: 608 करोड़ रुपये
इन सभी को मिलाकर करीब 12,666 करोड़ रुपये के कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। सरकार का कहना है कि इन मंजूरियों के जरिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सड़क, पुल और भवन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश में 6 हजार किलोमीटर सड़कें निर्माणाधीन
PWD मंत्री ने बताया कि इस समय छत्तीसगढ़ में करीब 6 हजार किलोमीटर लंबी सड़कों पर निर्माण या सुधार का काम चल रहा है। इसमें अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों की सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर करना, आवागमन में लगने वाले समय को कम करना और प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था को मजबूत करना है। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लोगों की आवाजाही के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है।
200 पुलों का निर्माण पूरा
सड़क नेटवर्क के साथ पुल निर्माण पर भी विभाग की ओर से काम किया गया है। अरुण साव ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक 1,258 करोड़ रुपये की लागत से 200 पुलों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। पुलों के निर्माण से उन इलाकों में आवागमन बेहतर करने में मदद मिली है जहां नदियों, नालों या अन्य भौगोलिक बाधाओं के कारण लोगों को लंबे रास्ते से जाना पड़ता था। PWD की ओर से पुलों के साथ-साथ सड़क संपर्क को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि एक परियोजना का लाभ आसपास के क्षेत्रों तक प्रभावी तरीके से पहुंच सके।
252 सरकारी भवनों का निर्माण पूरा
PWD के कामों में सड़क और पुल के अलावा सरकारी भवनों का निर्माण भी शामिल है। विभाग के मुताबिक, अब तक 252 भवनों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि 265 भवनों का निर्माण अभी जारी है। इनमें अलग-अलग विभागों और सरकारी संस्थानों से संबंधित भवन शामिल हैं। सरकार की ओर से सभी संभाग मुख्यालयों में अधूरे भवनों को पूरा करने के लिए आवश्यक मंजूरियां भी दी गई हैं। इसका उद्देश्य लंबे समय से अधूरे पड़े सरकारी निर्माण कार्यों को पूरा करके उनका उपयोग शुरू करना है।
PWD में 83 सब-इंजीनियर की भर्ती
विभागीय कामकाज को मजबूत करने के लिए कर्मचारियों और तकनीकी अधिकारियों की संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अरुण साव ने बताया कि PWD में 83 सब-इंजीनियरों की नई नियुक्ति की गई है। तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ने से निर्माण कार्यों की निगरानी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा विभाग में असिस्टेंट ग्रेड-3 के 100 पदों पर भर्ती शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इससे विभाग की प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कामों की निगरानी के लिए WAMIS लागू करने की तैयारी
लोक निर्माण विभाग में चल रहे निर्माण कार्यों और उनसे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की निगरानी के लिए WAMIS लागू करने की तैयारी की जा रही है। WAMIS का पूरा नाम Work and Accounts Monitoring Integration System है। इसके जरिए निर्माण कार्यों और उनसे संबंधित खातों की जानकारी को एकीकृत तरीके से मॉनिटर करने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। इस तरह की डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य विभाग में चल रही परियोजनाओं की प्रगति और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाना है। निर्माण कार्य किस स्थिति में है, कितना काम पूरा हुआ है और उससे संबंधित भुगतान या खाते की स्थिति क्या है- इन जानकारियों को एक ही सिस्टम के जरिए ट्रैक करने में मदद मिल सकती है।
बस्तर में 8 प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मंजूरी
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए 8 प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। बस्तर के कई हिस्से भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में आते हैं। ऐसे में बेहतर सड़क नेटवर्क स्थानीय लोगों के लिए आवागमन के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार की ओर से इन परियोजनाओं के जरिए बस्तर के अलग-अलग इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
रायपुर में नए रोड और फ्लाईओवर की तैयारी
राजधानी रायपुर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार को देखते हुए PWD ने कई नई सड़क परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें मोवा से सेरीखेड़ी तक सड़क निर्माण के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा लाभांडी से सड्डू तक सड़क निर्माण के लिए भी लगभग 100 करोड़ रुपये के काम की योजना है। इन सड़कों के बनने से शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच वैकल्पिक कनेक्टिविटी तैयार हो सकती है और मौजूदा प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
चांदनीडीह-सरोना बायपास का प्रस्ताव
रायपुर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए चांदनीडीह से सरोना तक बायपास बनाने की योजना भी सामने आई है। बायपास का उद्देश्य शहर के भीतर से गुजरने वाले ऐसे ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है, जिसे किसी खास इलाके में जाने के लिए शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है तो शहर के कुछ प्रमुख हिस्सों में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
बंजारी माता मंदिर के पास फ्लाईओवर का प्रस्ताव
रायपुर में यातायात को सुचारु बनाने के लिए बंजारी माता मंदिर के पास फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट का उद्देश्य व्यस्त चौराहों या प्रमुख जंक्शनों पर वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करना होता है। राजधानी में बढ़ते वाहनों की संख्या को देखते हुए PWD की ओर से ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं की मंजूरी और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद इनके पूरा होने से शहर के ट्रैफिक पैटर्न पर असर देखने को मिल सकता है।
रायपुर में ट्रैफिक कम करना प्रमुख लक्ष्य
PWD की राजधानी से जुड़ी योजनाओं में सड़क विस्तार के साथ-साथ बायपास और फ्लाईओवर निर्माण पर भी जोर दिया गया है। मोवा-सेरीखेड़ी और लाभांडी-सड्डू जैसी नई सड़कें शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध करा सकती हैं। वहीं चांदनीडीह-सरोना बायपास और बंजारी माता मंदिर के पास प्रस्तावित फ्लाईओवर का मकसद भीड़भाड़ वाले हिस्सों में ट्रैफिक को बेहतर तरीके से मैनेज करना है। सरकार की कोशिश है कि रायपुर के विस्तार के साथ सड़क नेटवर्क भी उसी अनुपात में विकसित हो, ताकि आने वाले वर्षों में यातायात संबंधी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके।
सड़क के साथ पुल और भवन निर्माण पर भी फोकस
PWD की योजनाओं को देखें तो विभाग का काम केवल नई सड़कों तक सीमित नहीं है। सरकार सड़क निर्माण के साथ पुल, सरकारी भवन और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों को भी आगे बढ़ा रही है। 6 हजार किलोमीटर सड़कें निर्माणाधीन होने के अलावा 200 पुलों का निर्माण पूरा होना और 265 भवनों पर काम जारी रहना विभाग के मौजूदा कार्यों का दायरा बताता है। वहीं, नई भर्तियों और WAMIS जैसे डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए विभागीय कामकाज को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
आगे किन कामों पर रहेगी नजर?
अब PWD के सामने मंजूर हो चुकी परियोजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने की चुनौती होगी। सड़क और पुल निर्माण के साथ रायपुर की प्रस्तावित परियोजनाओं की मंजूरी, टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी। खास तौर पर राजधानी की नई सड़क और फ्लाईओवर परियोजनाओं से लोगों को ट्रैफिक से राहत की उम्मीद है। वहीं बस्तर की सड़क परियोजनाओं से दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होने की संभावना है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक विभाग में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। आने वाले समय में इन परियोजनाओं की प्रगति और उनके पूरा होने की समयसीमा पर नजर रहेगी।