Operation Sindoor Documentary: ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने इस डॉक्यूमेंट्री को ‘प्रोपेगेंडा’ करार दिया है। उनका आरोप है कि फिल्म में 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष को केवल भारतीय नजरिए से पेश किया गया और पाकिस्तान के पक्ष को जगह नहीं दी गई। अहमद शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर डॉक्यूमेंट्री की आलोचना की। उन्होंने इसे ‘ट्रैजेडी और कॉमेडी’ तक बताया और आरोप लगाया कि फिल्म में चुनिंदा इंटरव्यू, भावनात्मक कहानी और फिल्मी प्रस्तुति के जरिए घटनाओं को भारत की सैन्य सफलता के तौर पर दिखाया गया है। यह डॉक्यूमेंट्री 15 अगस्त 2026 को डिस्कवरी चैनल पर रिलीज हुई और दो हिस्सों में ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि, उसकी तैयारी, कथित वॉर-रूम फैसलों और सैन्य कार्रवाई को प्रस्तुत करती है।
पाकिस्तान ने डॉक्यूमेंट्री पर क्या आपत्ति जताई?
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें घटनाओं को भारत के पक्ष में पेश किया गया है। उनके मुताबिक, फिल्म में चुनिंदा इंटरव्यू और भावनात्मक नैरेटिव के जरिए एक खास कहानी बनाई गई है। पाकिस्तान का कहना है कि किसी सैन्य कार्रवाई को एकतरफा तरीके से पेश करने से उस संघर्ष के दौरान वास्तव में क्या हुआ, यह नहीं बदल जाता। पाकिस्तानी पक्ष ने खास तौर पर डॉक्यूमेंट्री में ऑपरेशन सिंदूर के नतीजे को भारत की बड़ी सैन्य जीत के तौर पर प्रस्तुत किए जाने पर आपत्ति जताई है।
डॉक्यूमेंट्री में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले से शुरू होती है कहानी
डॉक्यूमेंट्री की कहानी 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले से शुरू होती है। इसमें हमले की घटनाओं और उसके बाद भारत सरकार के स्तर पर हुई गतिविधियों को दिखाया गया है। डॉक्यूमेंट्री में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के हवाले से बताया गया है कि हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना को गंभीरता से लिया और हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान तथा उनके खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया। फिल्म में पहलगाम हमले को ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि के तौर पर रखा गया है और इसके बाद भारत सरकार तथा सुरक्षा प्रतिष्ठान की ओर से की गई तैयारियों को क्रमवार दिखाने की कोशिश की गई है।
पीएम मोदी ने मांगी थी हमले के जिम्मेदार लोगों की जानकारी
डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक, पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश यात्रा बीच में समाप्त कर भारत लौटने का फैसला किया। इसके बाद सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें हुईं। फिल्म में अजीत डोभाल बताते हैं कि प्रधानमंत्री इस घटना को लेकर बेहद गंभीर थे। डॉक्यूमेंट्री में यह दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री ने हमले के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने के स्पष्ट निर्देश दिए। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और सेना के स्तर पर संभावित जवाबी कार्रवाई की योजना तैयार करने की प्रक्रिया दिखाई गई है।
वॉर रूम में तैयार हुई ऑपरेशन सिंदूर की योजना
डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के लिए एक विस्तृत सैन्य योजना तैयार की गई थी। इसमें लक्ष्य चुनने से लेकर कार्रवाई की रणनीति तक कई स्तरों पर तैयारी की गई। फिल्म में सैन्य अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि भारत का घोषित निशाना पाकिस्तान की पूरी सैन्य व्यवस्था नहीं, बल्कि आतंकवादी संगठनों से जुड़े ठिकाने थे। डॉक्यूमेंट्री में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ठिकानों को प्रमुख लक्ष्य के रूप में पेश किया गया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के हवाले से फिल्म में बताया गया है कि इस मिशन का नाम प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा था।
6-7 मई की रात पाकिस्तान और PoK में कार्रवाई का दावा
डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि 6-7 मई 2025 की रात भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। फिल्म में दावा किया गया है कि कुल 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। इनमें बहावलपुर और मुरीदके जैसे स्थानों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ा जाता है। डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, इन हमलों में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया है। हालांकि, सैन्य कार्रवाई और उसके परिणामों को लेकर भारत और पाकिस्तान के दावों में अंतर रहा है।
पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया
डॉक्यूमेंट्री में इसके बाद पाकिस्तान की ओर से की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र है। इसमें पाकिस्तान के ऑपरेशन बुनियान अल-मरसूस शुरू करने और भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के प्रयासों का उल्लेख किया गया है। फिल्म में पाकिस्तानी F-16 और JF-17 लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल की बात कही गई है। इसके जवाब में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई और पाकिस्तान के कुछ सैन्य ठिकानों, एयरबेस तथा रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इस पूरे सैन्य संघर्ष के दौरान दोनों देशों ने अपनी-अपनी सैन्य उपलब्धियों और नुकसान को लेकर अलग-अलग दावे किए थे।
पाकिस्तान ने 8 भारतीय विमानों को गिराने का दावा किया
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि चार दिन चले संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने 8 भारतीय सैन्य विमान गिराए थे। भारत की ओर से पाकिस्तान के इस दावे को पहले ही खारिज किया जा चुका है। इसलिए विमान नुकसान से जुड़े आंकड़े अभी भी दोनों देशों के बीच विवादित दावों का हिस्सा हैं। यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर की सैन्य कार्रवाई और उसके परिणामों को लेकर भारत तथा पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों में काफी अंतर देखने को मिलता है।
सीजफायर को लेकर भी पाकिस्तान ने उठाए सवाल
पाकिस्तान ने डॉक्यूमेंट्री में संघर्ष के अंत को भारत की एकतरफा जीत के तौर पर दिखाए जाने पर भी आपत्ति जताई है। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि संघर्ष का अंत दोनों देशों के DGMO (Director General of Military Operations) के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ था। पाकिस्तान का तर्क है कि जब सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद लड़ाई रुकी, तो इसे केवल एकतरफा भारतीय जीत के तौर पर पेश करना सही नहीं है। पाकिस्तानी पक्ष ने डॉक्यूमेंट्री के नैरेटिव में कथित विरोधाभास की ओर भी इशारा किया। उसका कहना है कि एक तरफ फिल्म में भारतीय सैन्य कार्रवाई को बेहद प्रभावी बताया गया है, जबकि दूसरी तरफ संघर्ष को सीमित रखने और आगे escalation से बचने की बात भी सामने आती है।
88 घंटे के संघर्ष की कहानी डॉक्यूमेंट्री में
फिल्म में पहलगाम हमले से लेकर भारत की जवाबी कार्रवाई और उसके बाद सैन्य तनाव कम होने तक की घटनाओं को एक क्रम में पेश किया गया है। डॉक्यूमेंट्री में यह नैरेटिव रखा गया है कि 22 अप्रैल के हमले के बाद भारत ने करीब दो सप्ताह तक सैन्य और रणनीतिक स्तर पर तैयारी की और इसके बाद 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के जरिए जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और कुछ ही दिनों में DGMO स्तर पर बातचीत के बाद संघर्ष रोकने की स्थिति बनी। हालांकि, संघर्ष की अवधि, नुकसान, सैन्य सफलता और सीजफायर की परिस्थितियों को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर है।
पाकिस्तान ने कहा- फिल्म से वास्तविक घटनाएं नहीं बदलेंगी
अहमद शरीफ चौधरी ने अपने बयान में डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तुति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वीडियो, इंटरव्यू और भावनात्मक कहानी के जरिए किसी घटना का नैरेटिव बदला जा सकता है, लेकिन इससे वास्तविक घटनाएं नहीं बदलतीं। पाकिस्तान का आरोप है कि डॉक्यूमेंट्री में उसकी सैन्य प्रतिक्रिया और उसके दावों को पर्याप्त जगह नहीं दी गई। वहीं, डॉक्यूमेंट्री का पूरा फोकस भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर की योजना और कार्रवाई पर रखा गया है। इसलिए इसमें भारतीय अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व के इंटरव्यू प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
पहलगाम से ऑपरेशन सिंदूर तक कैसे बढ़ा तनाव?
भारत और पाकिस्तान के बीच इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए। 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और कई दिनों तक जवाबी कार्रवाई तथा आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। आखिरकार 10 मई 2025 को DGMO स्तर की बातचीत के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
डॉक्यूमेंट्री को लेकर भारत-पाकिस्तान के दावों में अंतर
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी इस डॉक्यूमेंट्री ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच उस सैन्य संघर्ष की अलग-अलग व्याख्याओं को सामने ला दिया है। भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर को आतंकी हमले के जवाब में की गई लक्षित कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि पाकिस्तान लगातार भारत के दावों को चुनौती देता रहा है। अब डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान की आपत्ति के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। खास बात यह है कि दोनों देशों के आधिकारिक दावों में सैन्य नुकसान, विमानों के गिरने, लक्ष्यों पर हुए असर और संघर्ष के परिणाम को लेकर अंतर बना हुआ है।