स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हंतावायरस संक्रमण का एक नया मामला सामने आने की पुष्टि की है। संक्रमित व्यक्ति उन 14 स्पेनिश नागरिकों में शामिल है, जो अप्रैल में अटलांटिक महासागर पार करते समय एमवी होंडियस क्रूज जहाज पर फैले संक्रमण की चपेट में आए थे।
कड़ी निगरानी में रखा गया संक्रमित यात्री
जानकारी के अनुसार, जहाज पर सवार सभी 14 स्पेनिश नागरिकों को 10 मई को Tenerife से विशेष निगरानी अभियान के तहत निकाला गया था। इसके बाद से सभी को Gomez Ulla Central Defense Hospital में एहतियाती क्वारंटाइन में रखा गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि नया पॉजिटिव मामला नियमित पीसीआर जांच के दौरान सामने आया। फिलहाल संक्रमित व्यक्ति में किसी प्रकार के लक्षण नहीं दिखाई दिए हैं, लेकिन उसे अस्पताल की हाई-लेवल आइसोलेशन यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां सख्त बायोसेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत निगरानी की जा रही है।
आम लोगों के लिए फिलहाल खतरा नहीं
स्पेन सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए मामले के सामने आने के बावजूद आम जनता के लिए जोखिम का स्तर नहीं बढ़ा है। साथ ही महामारी से जुड़े मौजूदा सुरक्षा उपायों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मैड्रिड पहुंचने के बाद पॉजिटिव पाए जाने वाला यह दूसरा स्पेनिश नागरिक है। इससे पहले संक्रमित पाए गए मरीज की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
क्या है हंतावायरस?
World Health Organization के अनुसार, हंतावायरस एक जूनोटिक वायरस है, जो मुख्य रूप से कृन्तकों यानी चूहों और अन्य रोडेंट्स में पाया जाता है। यह वायरस कभी-कभी इंसानों में भी फैल सकता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में अलग असर
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका में यह संक्रमण हंतावायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS) का कारण बनता है, जो फेफड़ों और दिल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। वहीं यूरोप और एशिया में यह हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) से जुड़ा माना जाता है, जो किडनी और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है।
बीमारी का कोई विशेष इलाज नहीं
फिलहाल हंतावायरस संक्रमण का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती पहचान और समय पर मेडिकल सपोर्ट से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। उपचार के दौरान श्वसन, हृदय और किडनी संबंधी जटिलताओं पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
रोकथाम ही सबसे बड़ा बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका संक्रमित रोडेंट्स और इंसानों के बीच संपर्क को कम करना है। साफ-सफाई बनाए रखना और संक्रमित क्षेत्रों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी माना जा रहा है।