मध्य प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य को संवारने वाले अतिथि विद्वानों (Guest Faculty) के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा भरोसा दिया है। भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने उन्हें शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि "अतिथि विद्वान केवल रिक्त पद भरने वाले कर्मचारी नहीं, बल्कि शिक्षा मंदिर के पुजारी हैं।" मुख्यमंत्री ने अतिथि विद्वानों से अन्य राज्यों के बेहतर मॉडल का अध्ययन कर प्रस्ताव देने का भी आग्रह किया और भरोसा दिलाया कि सरकार सकारात्मक सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी। सम्मेलन में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
'अटकाने-लटकाने का दौर खत्म, अब आगे बढ़ने का समय'
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार समस्याओं को टालने की बजाय उनका समाधान करने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वानों के लिए भारतीय मजदूर संघ के सहयोग से एक समिति बनाई गई है। यदि किसी अन्य राज्य की बेहतर व्यवस्था लागू की जा सकती है तो उसका प्रस्ताव तैयार कर सरकार के सामने रखा जाए। सरकार सकारात्मक सुझावों का स्वागत करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और अतिथि विद्वानों के बीच विश्वास का रिश्ता कायम रहेगा और उनके हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
'अतिथि विद्वान केवल कर्मचारी नहीं, भविष्य निर्माता हैं'
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वान केवल रिक्त पदों को भरने वाले कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे ऐसे गुरु हैं जो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तैयार करते हैं। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राम और कृष्ण के उदाहरण देकर समझाई गुरु की महत्ता
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि गुरु विश्वामित्र और गुरु वशिष्ठ ने श्रीराम के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा प्राप्त कर जीवन का नया अध्याय शुरू किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, किसी भी समाज का भविष्य उसके शिक्षकों के आत्मविश्वास और समर्पण पर निर्भर करता है।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने बताया कि-
प्रदेश में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज शुरू किए गए।
नए विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था में नवाचार और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
स्कूलों में ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य करने की दिशा में काम हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और मध्य प्रदेश युवा आबादी के लिहाज से अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
अतिथि विद्वानों को पहले ही मिल चुकी हैं कई सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अतिथि विद्वानों के हित में कई फैसले पहले ही लागू किए हैं। इनमें प्रमुख हैं-
13 आकस्मिक अवकाश।
3 ऐच्छिक अवकाश।
महिला अतिथि विद्वानों को प्रसूति अवकाश।
वर्ष में एक बार स्थान परिवर्तन की सुविधा।
लोक सेवा आयोग की भर्ती में 25% आरक्षण।
विशेष परिस्थितियों में दोबारा कार्य का अवसर।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2022 और 2024 में बड़ी संख्या में अतिथि विद्वानों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं।
2029 तक नशामुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में शिक्षा के साथ सामाजिक मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में प्रदेश सरकार वर्ष 2029 तक मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने के अभियान पर गंभीरता से काम करेगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई है, उसी तरह नशे के खिलाफ भी व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सरकार लगातार अतिथि विद्वानों के हित में निर्णय ले रही है। उन्होंने बताया कि-
आकस्मिक और ऐच्छिक अवकाश लागू किए गए।
प्रसूति अवकाश की सुविधा दी गई।
सहायक प्राध्यापक भर्ती में 25% आरक्षण लागू किया गया।
स्थानांतरण और पुनः कार्य अवसर जैसी सुविधाएं दी गईं।
अतिथि विद्वानों के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो भविष्य के सुधारों पर सुझाव देगी।
FAQs
1. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों के लिए क्या कहा?
उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वान शिक्षा मंदिर के पुजारी हैं और सरकार उनके हित में हरसंभव कार्य करेगी।
2. कार्यक्रम कहां आयोजित हुआ?
राज्य स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित किया गया।
3. अतिथि विद्वानों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिल रही हैं?
आकस्मिक अवकाश, प्रसूति अवकाश, स्थान परिवर्तन, 25% आरक्षण सहित कई सुविधाएं।
4. सरकार ने नई क्या पहल की है?
बेहतर व्यवस्था के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है, जो सुझाव देकर सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी।
5. मुख्यमंत्री ने नशामुक्त मध्य प्रदेश को लेकर क्या कहा?
उन्होंने वर्ष 2029 तक प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने का संकल्प दोहराया।
निष्कर्ष
भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों को सरकार का पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका को सर्वोपरि बताते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। साथ ही शिक्षा सुधार, रोजगार, युवा सशक्तिकरण और नशामुक्त मध्य प्रदेश जैसे विषयों पर भी सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं।