मुंबई से सामने आई इस खबर ने पूरी म्यूजिक इंडस्ट्री को गहरे शोक में डाल दिया है। प्रसिद्ध संगीतकार अभिजीत मजूमदार अब हमारे बीच नहीं रहे। वे बीते कई महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और 25 जनवरी को उन्होंने जिंदगी की जंग हारते हुए अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल फिल्म जगत बल्कि उनके असंख्य प्रशंसकों में भी गहरा दुःख व्याप्त है।
लंबी बीमारी और संघर्ष की कहानी
अभिजीत मजूमदार की तबीयत 27 अगस्त 2025 को अचानक बिगड़ गई थी। शुरुआत में उन्हें कटक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच में उनके सोडियम लेवल में गंभीर गिरावट सामने आई। हालत बिगड़ने पर 31 अगस्त को उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया और बाद में स्थिति और नाजुक होने पर 4 सितंबर को उन्हें AIIMS भुवनेश्वर के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया। उस समय वे कोमा जैसी स्थिति में थे और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था।
AIIMS भुवनेश्वर में चला लंबा इलाज
एम्स भुवनेश्वर में डॉक्टरों की कई विशेषज्ञ टीम उनकी देखभाल में जुटी रही। हालांकि 21 सितंबर 2025 को उन्हें वेंटिलेटर से हटाया गया, लेकिन उनका सेंट्रल नर्वस सिस्टम गंभीर रूप से प्रभावित था। सितंबर के अंत में कुछ सुधार के संकेत मिलने पर उन्हें आईसीयू से बाहर शिफ्ट किया गया, लेकिन इलाज लगातार जारी रहा। नवंबर और दिसंबर में उनकी सेहत में सुधार की खबरें आईं, यहां तक कि 31 दिसंबर को उनके जल्द डिस्चार्ज होने की उम्मीद जताई गई, मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
25 जनवरी को थम गई सुरों की सांस
कई महीनों के संघर्ष के बाद 25 जनवरी को अभिजीत मजूमदार ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। उनके निधन की पुष्टि होते ही संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर कलाकारों, संगीतकारों और प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
तीन दशकों का स्वर्णिम संगीत सफर
अभिजीत मजूमदार का करियर लगभग तीन दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने 700 से अधिक गीतों की रचना की। फिल्मों से लेकर म्यूजिक एलबम्स तक उनकी धुनों ने श्रोताओं के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। ‘लव स्टोरी’, ‘सिस्टर श्रीदेवी’, ‘गोलमाल लव’, ‘सुंदरगढ़ रा सलमान खान’ और ‘श्रीमान सूरदास’ जैसी फिल्मों का संगीत आज भी लोगों की जुबान पर है। उनकी रचनाओं में भावनाओं की गहराई और संगीत की सादगी का अद्भुत मेल देखने को मिलता था।
सुरों के जरिए हमेशा जिंदा रहेंगे
अभिजीत मजूमदार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संगीत आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें जीवित रखेगा। उनके सुर, उनकी धुनें और उनकी रचनात्मकता संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा गूंजती रहेंगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने संगीत को केवल पेशा नहीं, बल्कि साधना के रूप में जिया।
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