प्रदेश में लंबे समय से बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया। जांच में कई ब्रांड्स का पानी पीने योग्य मानकों पर खरा नहीं उतरा, जिसके बाद विभाग ने जनहित में तत्काल प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।
लैब जांच में फेल हुए पानी के सैंपल
एफएसडीए की टीमों ने अलग-अलग जिलों से बोतलबंद पानी के नमूने एकत्र किए। प्रयोगशाला जांच में कई कंपनियों के सैंपल गुणवत्ता मानकों में असफल पाए गए। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकेब ने स्पष्ट किया कि इस तरह का दूषित पानी आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभाव भी सामने आ सकते हैं।
जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता
डॉ. रोशन जैकेब ने कहा कि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा है। बोतलबंद पानी पर लोग भरोसा करके उसका सेवन करते हैं, ऐसे में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है। इसी कारण जांच रिपोर्ट आते ही कड़ी कार्रवाई की गई।
48 घंटे में स्टॉक विवरण देने के निर्देश
एफएसडीए आयुक्त ने प्रतिबंधित सभी कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे 48 घंटे के भीतर अपने उपलब्ध स्टॉक का पूरा विवरण विभाग को सौंपें। साथ ही, जिला स्तर के अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि इन ब्रांड्स की बिक्री और सप्लाई पर तुरंत प्रभाव से रोक सुनिश्चित की जाए।
आगे भी जारी रहेगी सख्ती
विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई अंतिम नहीं है। आने वाले दिनों में भी जांच अभियान जारी रहेगा और यदि किसी अन्य ब्रांड या यूनिट में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एफएसडीए ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर लाइसेंस रद्द करने और कानूनी मुकदमे दर्ज करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
उपभोक्ताओं से सतर्क रहने की अपील
एफएसडीए ने आम उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे बोतलबंद पानी खरीदते समय ब्रांड, लाइसेंस नंबर और गुणवत्ता मानकों की जांच जरूर करें। किसी भी संदिग्ध उत्पाद की जानकारी तुरंत विभाग को देने की सलाह दी गई है।
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