लोकसभा चुनाव अब आखिरी चरण में हैं, जबकि मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव 13 मई को पूरा हो चुका था। इस बार प्रदेश में चार चरणों में चुनाव हुआ है, जिसमें वोटिंग प्रतिशत में उतार-चढ़ाव वाली स्थिति देखने को मिली है। पहले दो चरणों में मतदान में कमी देखी गई, लेकिन तीसरे और चौथे चरण में मतदान में बढ़ोत्तरी हुई। ऐसे में वोटिंग परसेंटेज के जो फाइनल आंकड़े आए हैं, उन पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासत शुरू हो गई हैं, क्योंकि कांग्रेस ने चुनाव आयोग के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं, तो बीजेपी ने भी लगे हाथ कांग्रेस पर पलटवार कर दिया।
क्या था मामला
दरअसल, कमलनाथ की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद पूरे मामले पर सियासत शुरू हुई है। उन्होंने बुधवार को एक पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने लिखा 'देश में चल रहे लोक सभा चुनाव में रियल टाइम मतदान और बाद में निर्वाचन आयोग द्वारा जारी संशोधित मतदान के आंकड़ों में अब तक 1.07 करोड़ वोटों की वृद्धि हुई है। रियल टाइम और संशोधित आंकड़ों में वोटों की इतनी बड़ी वृद्धि अभूतपूर्व एवं चौंकाने वाली है। मैं माननीय निर्वाचन आयोग से आग्रह करता हूं कि वह तत्काल स्थिति को स्पष्ट करे। चुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होने के साथ पारदर्शी भी होनी चाहिए। माननीय निर्वाचन आयोग को सभी भ्रम और शंका दूर करने के लिए सामने आना चाहिए और स्पष्ट बताना चाहिए कि आखिर वोटिंग के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर कैसे आया और इसकी क्या वजह है।
कांग्रेस एक्टिव हो गई
कमलनाथ के इस पोस्ट के बाद MP में कांग्रेस इस मामले में एक्टिव हो गई। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव रवि सक्सेना ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा पहली बार ऐसा हो रहा है जब 11 दिन बाद तक वोटिंग परसेंटज बढ़ रहा है, आंकड़ों के अनुसार, हर विधानसभा में 28 हजार वोटर बढ़ गए है। ऐसे में इस पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका दिख रही है। ऐसा करके देश की जनता के साथ छलावा किया जा रहा है।
हार की हताशा से पहले कांग्रेस ने रिहर्सल शुरू कर दी - यशपाल सिंह सिसोदिया
वहीं कांग्रेस के इन आरोपों पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है, बीजेपी के पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा 'हार की हताशा से पहले कांग्रेस ने रिहर्सल शुरू कर दी है, कांग्रेस की हालत उस स्टूडेंट की तरह है जो साल भर पढ़ाई नहीं करता और रिजल्ट पर सवाल उठाता है। दिग्विजय और कमलनाथ हमेशा भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं, दोनों कभी ईवीएम तो कभी वोटिंग प्रतिशत पर सवाल उठाते हैं, फॉर्म 17C ऐसा दस्तावेज जो मतदान के दिन एजेंट को दिया जाता है। जब मतपेटी खुलती है तो उसका मिलान किया जाता है, ऐसे में हेर फेर का आरोप पूरी तरह मिथ्या है।'
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