मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार रात उज्जैन आए। वे क्षीरसागर स्टेडियम में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता में बतौर अतिथि शामिल हुए। उन्होंने उज्जैन में जल्द ही मलखंभ अकादमी खोले जाने की घोषणा की। कहा कि शीघ्र ही जिम्नास्टिक की भी सौगात मिलेगी। उन्होंने उज्जैन के सभी 15 अखाड़ों को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की।
गुड़ी पड़वा को पूरे प्रदेश में ‘सृष्टि आरंभ दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अगले वर्ष गुड़ी पड़वा का त्योहार पूरे प्रदेश में ‘सृष्टि आरंभ दिवस’ के रूप में मनाने को कहा है। अफसरों से कहा है कि विक्रमोत्सव महाशिवरात्रि से गुड़ी पड़वा तक करने की तैयारी अभी से प्रारंभ करें।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को विक्रमादित्य पर आधारित करें। उनकी कविताओं को लेखबद्ध करें। वे भोपाल में गुरुवार को अगले वर्ष होने वाले विक्रमोत्सव की तैयारी और कोठी महल को 80 करोड़ रुपये से वीर भारत संग्रहालय के रूप में तब्दील करने को बैठक ले रहे थे। कहा कि इस बार विक्रमोत्सव दो चरण में होगा।
मंदिरों में प्रभु शृंगार प्रतियोगिता
पहले चरण में महाशिवरात्रि से गुड़ी पड़वा तक महाकाल शिवज्योति अर्पणम, विक्रम व्यापार मेला, मंदिरों में प्रभु शृंगार प्रतियोगिता, अभा कवि सम्मेलन, राष्ट्रीय वैज्ञानिक समागम, पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव, विक्रम नाट्य समारोह, अंतर्राष्ट्रीय इतिहास समागम, प्रदर्शनी, प्रकाशन, अवार्ड, लोक प्रसिद्ध कलाकार की सांगीतिक प्रस्तुति की जाएंगी।
समारोह के दौरान अतिथियों और विद्यार्थियों को महाकाल देवदर्शन के साथ उज्जैन के इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और मूल्यों से परिचय कराया जाएगा। विक्रमोत्सव के दूसरे चरण में 30 मार्च से ही 30 जून तक पूरे प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जाएगा। इसमें प्रदेश की नदियों, जल संरचनाओं के संरक्षण- संवर्धन का कार्य प्रदेश स्तर पर किया जाएगा। इस महती आयोजन का समापन गंगा दशहरा पर विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजन के साथ किया जाएगा।
कालिदास समारोह का खर्च घटाने के लिए मुख्यमंत्री ने कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में मुक्ताकाश मंच के सामने स्थायी डोम बनाने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि हर साल अस्थायी डोम बनाने पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं।
अब तक जितना रुपया खर्च हुआ है उससे आधे में तो स्थायी डोम बन जाता। उन्होंने कालिदास समारोह की ब्रांडिंग और पब्लिसिटी पर विशेष ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने संग्रहालय में दीर्घाओं के विषय के आधार पर संग्रहालय के नाम परिवर्तन पर भी विचार करने को कहा।
यह भी जानिये
वर्ष 2023 में विक्रमोत्सव 33 दिन का था हुआ था। 2024 में 42 दिन का हुआ। अगले वर्ष 2025 में 101 दिन से अधिक का करना प्रस्तावित है। शुरू के वर्षों में महज यह सांस्कृतिक आयोजन भर था, लेकिन अब यह सामाजिक, सांस्कृतिक, विरासत और विकास के बहुत से आयामों का आयोजन बन चुका है।
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