वर्तमान में मध्यप्रदेश के मौसम को प्रभावित करने वाली कोई प्रभावी मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है। मानसून द्रोणिका भी हिमालय की तलहटी में पहुंच गई है। इस वजह से मानसून की गतिविधियां लगभग थम सी गई हैं।
वातावरण में नमी रहने से कहीं-कहीं आंशिक बादल बने हुए हैं। बीच-बीच में धूप निकलने से तापमान के साथ ही उमस भी बढ़ रही है। हवाओं का रुख लगातार पश्चिमी बना रहने से नमी मिल रही है। इस वजह से तापमान में विशेष बढ़ोतरी होने की उम्मीद कम है।
बौछारें भी पड़ सकती हैं
साथ ही तापमान बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं बौछारें पड़ सकती हैं। इसी क्रम में रविवार को सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे तक रायसेन में चार, भोपाल में 2.2, सागर में दो, पचमढ़ी में 0.4 मिलीमीटर वर्षा हुई।
वर्तमान में मध्यप्रदेश के मौसम को प्रभावित करने वाली कोई प्रभावी मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है। मानसून द्रोणिका भी हिमालय की तलहटी में पहुंच गई है। इस वजह से मानसून की गतिविधियां लगभग थम सी गई हैं। वातावरण में नमी रहने से कहीं-कहीं आंशिक बादल बने हुए हैं। बीच-बीच में धूप निकलने से तापमान के साथ ही उमस भी बढ़ रही है। हवाओं का रुख लगातार पश्चिमी बना रहने से नमी मिल रही है। इस वजह से तापमान में विशेष बढ़ोतरी होने की उम्मीद कम है।
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