इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की त्रि-सेवा झांकी भी मुख्य आकर्षण रही। कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत झांकी का विषय था ‘ऑपरेशन सिंदूर: जॉइंटनेस के माध्यम से विजय’, जो भारत की विकसित और आत्मनिर्भर सैन्य सोच को दर्शाती है। झांकी यह संदेश देती है कि सटीक हमले, तीनों सेनाओं का तालमेल और स्वदेशी ताकत ही विजय की कुंजी हैं। यह दिखाती है कि भारत अब निर्णायक, संयुक्त और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति के रूप में पूरी मजबूती से खड़ा है। गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत बीते साल पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले क्षेत्रों में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया था।
आकाश वायु रक्षा प्रणाली देश की मजबूत बहु-स्तरीय वायु सुरक्षा का प्रतीक है
झांकी में थलसेना, नौसेना और वायुसेना का तालमेल प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया। शुरुआत भारतीय नौसेना के दमखम से होती है, जो समुद्र में नियंत्रण और दुश्मन की हरकतों को रोकने की क्षमता को दर्शाती है। इसके बाद थलसेना का सख्त और निर्णायक रूप सामने आता है, जिसमें एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर से सटीक गोलाबारी दिखाई गई। पीछे आकाश वायु रक्षा प्रणाली देश की मजबूत बहु-स्तरीय वायु सुरक्षा का प्रतीक है
नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का संदेश स्पष्ट
झांकी में नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का संदेश भी स्पष्ट है: तेज कार्रवाई, स्थिति पर नियंत्रण और सटीक हमले। हारोप लोइटरिंग म्यूनिशन दुश्मन के एयर डिफेंस रडार को निष्क्रिय करता है, जबकि स्कैल्प मिसाइलों से लैस राफेल विमान आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करता है। सुखोई से दागी गई ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दुश्मन के एयरक्राफ्ट शेल्टर को तबाह करती है। सबसे निर्णायक दृश्य में एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली दिखाई जाती है, जिसमें एस-400 सिस्टम 350 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य भेदते हुए दुश्मन के एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को निष्क्रिय करता है। यह दर्शाता है कि भारत पहले देखता है, पहले निर्णय लेता है और पहले हमला करता है।
तीनों सेनाओं का तालमेल
ऑपरेशन सिंदूर यह भी स्पष्ट करता है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को तेज, सटीक और कड़ा जवाब मिलेगा। झांकी में दिखाया गया कि भारतीय स्वदेशी रक्षा प्रणालियां अब सिर्फ बराबरी नहीं कर रही हैं, बल्कि कई मामलों में अग्रणी हैं। तीनों सेनाओं का तालमेल, नागरिक-सैन्य सहयोग और रियल-टाइम ऑपरेशनल समन्वय भारत की विश्वसनीय सैन्य शक्ति की रीढ़ बन चुके हैं। कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत का रणनीतिक संदेश है: ‘जॉइंटनेस से विजय’ अब उसकी पहचान और ताकत का नया प्रतीक है।
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