देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग आज इन राज्यों में मतदान की तिथियों की घोषणा कर सकता है। इस घोषणा के लिए राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है। तारीखों के एलान के साथ ही इन राज्यों में आचार संहिता लागू हो सकती है और चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।
निर्धारित समय सीमा के भीतर होंगे चुनाव
संविधान के अनुसार किसी भी राज्य की विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले वहां चुनाव कराना अनिवार्य होता है। इन पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई से जून के बीच समाप्त हो रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल सात मई को समाप्त होगा, जबकि तमिलनाडु की विधानसभा दस मई तक प्रभावी रहेगी। असम में बीस मई को कार्यकाल समाप्त होगा और केरल विधानसभा का कार्यकाल तेइस मई तक है। पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल पंद्रह जून को समाप्त हो रहा है, इसलिए चुनाव आयोग को उससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
कुल 824 सीटों पर होगा मतदान
इन पांचों राज्यों में कुल आठ सौ चौबीस विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। सबसे अधिक सीटें पश्चिम बंगाल में हैं, जहां दो सौ चौरानवे सीटों पर मतदान होगा। तमिलनाडु में दो सौ चौंतीस सीटों पर चुनाव आयोजित किए जाएंगे। असम में एक सौ छब्बीस सीटें हैं, जबकि केरल में एक सौ चालीस सीटों के लिए मतदान होगा। पुडुचेरी में तीस सीटों के लिए चुनाव कराए जाएंगे। इस प्रकार इन राज्यों के चुनाव देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा चुनावी मुकाबला
पश्चिम बंगाल में लगभग सात करोड़ मतदाता हैं, जिनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है। पिछली बार यहां आठ चरणों में मतदान हुआ था। उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को दो सौ पंद्रह सीटों पर विजय मिली थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी को सतहत्तर सीटें प्राप्त हुई थीं। इन परिणामों के बाद ममता बनर्जी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
दक्षिण भारत के राज्यों में भी सियासी हलचल
तमिलनाडु में लगभग पांच करोड़ साठ लाख मतदाता हैं और यहां दो सौ चौंतीस सीटों पर चुनाव होना है। पिछले चुनाव में एक ही चरण में मतदान हुआ था, जिसमें द्रविड़ मुनेत्र कषगम को बहुमत मिला था और एम.के. स्टालिन मुख्यमंत्री बने थे। केरल में भी लगभग दो करोड़ साठ लाख मतदाता हैं। वहां पिछले चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था और पिनराई विजयन ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला था।
पूर्वोत्तर और केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव
असम में लगभग दो करोड़ चालीस लाख मतदाता हैं और यहां एक सौ छब्बीस सीटों पर चुनाव होगा। पिछले चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को बहुमत मिला था और हिमंत बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बने थे। वहीं पुडुचेरी में लगभग नौ लाख से अधिक मतदाता हैं और वहां तीस सीटों के लिए मतदान कराया जाएगा। इस छोटे लेकिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रशासित प्रदेश में भी चुनावी मुकाबला रोचक रहने की संभावना है।
चुनावी घोषणा से तेज होगी राजनीतिक गतिविधि
चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा होते ही इन राज्यों में चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी। विभिन्न राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों की घोषणा, प्रचार रणनीति और जनसभाओं के माध्यम से मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनावों के परिणाम आने वाले समय में देश की राजनीति पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।
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