कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून के पहले या दूसरे सप्ताह में शुरू होने जा रही है। यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 30 अप्रैल से शुरू हो गए हैं, जिससे श्रद्धालु अब आवेदन कर सकेंगे।
दो मार्गों से जाएंगे 1000 श्रद्धालु
- इस बार यात्रा दो प्रमुख रास्तों से आयोजित होगी:
- लिपुलेख दर्रा (पिथौरागढ़) के जरिए 10 दलों में 500 यात्री
- नाथुला दर्रा के रास्ते 500 श्रद्धालु
- कुल मिलाकर इस साल 1000 श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की यात्रा करेंगे।
60 साल बाद बना दुर्लभ ‘अग्नि अश्व वर्ष’ योग
इस वर्ष यात्रा का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि 60 साल बाद ‘अग्नि अश्व वर्ष’ का विशेष संयोग बन रहा है। इसे हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
तीनों धर्मों के श्रद्धालु करेंगे यात्रा
इस खास योग के कारण इस बार भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायी बड़ी संख्या में इस यात्रा में भाग लेंगे।
तिब्बती ज्योतिष में विशेष महत्व
तिब्बती ज्योतिष के अनुसार यह 60 वर्षों के चक्र का विशेष वर्ष है, जिसमें अग्नि तत्व और अश्व (घोड़ा) राशि का संगम होता है। इसे अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
एक परिक्रमा का फल 12 के बराबर
मान्यता है कि अश्व वर्ष में कैलाश मानसरोवर की एक परिक्रमा करने से सामान्य वर्षों की 12 परिक्रमा के बराबर पुण्य मिलता है। यही वजह है कि इस वर्ष यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।