कोलकाता - पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने राज्य में पांच नए विकास बोर्ड बनाने का ऐलान किया है। ये बोर्ड मुख्य रूप से आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों के लिए बनाए गए हैं।
चुनाव से पहले राज्य में 5 विकास बोर्ड का गठन
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि नई बोर्डें मुंडा (अनुसूचित जनजाति), कोरा (अनुसूचित जनजाति), डोम (अनुसूचित जाति), कुंभकार (अन्य पिछड़ा वर्ग) और सदगोपे (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदायों के लिए स्थापित की जा रही हैं। उनका कहना है कि ये समुदाय बंगाल की जीवंत संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।
विकास बोर्ड नहीं बल्कि वोट पाने का बोर्ड है
टीएमसी ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वोटों की राजनीति करार दिया है। बीजेपी के नेता राहुल सिन्हा का कहना है कि यह केवल वोट पाने की चाल है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम को लेकर हुए नुकसान की भरपाई कर रही हैं। वहीं पूर्व सांसद और सीपीआई (एम) के नेता सुजान चक्रवर्ती इसे विकास बोर्ड नहीं बल्कि वोट पाने का बोर्ड बता रहे हैं।
टीएमसी सरकार के पहले के बोर्ड
टीएमसी सरकार ने 2013 से अब तक कई समुदायों के लिए विकास और सांस्कृतिक बोर्ड बनाए हैं। इनमें 2013 और 2015 के बीच दार्जिलिंग के लेपचा, शेरपा, तमांग और भूटिया समुदायों के बोर्ड शामिल हैं। 2016 में लिंबू विकास बोर्ड और कामी, दमाई, सरकी समुदायों के बोर्डों की घोषणा की गई। मई 2017 में राजबंशी संस्कृति एवं विकास बोर्ड, और नवंबर 2018 में नामसूद्र और मतुआ विकास बोर्ड की स्थापना हुई थी।
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