भोपाल। मध्य प्रदेश में इस साल उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए कई महोत्सव आयोजित किए जाएंगे, जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की समीक्षा के दौरान कहा कि उद्यानिकी फसलें छोटी जगह से बड़ी कमाई का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने किसानों को प्रेरित करने पर बल दिया कि वे जैविक खेती और प्राकृतिक खाद का उपयोग करके सीजनल और उद्यानिकी फसलों का उत्पादन बढ़ाएँ।
महोत्सवों का कैलेंडर
जून:भोपाल में आम महोत्सव
जुलाई: खरगोन में मिर्च महोत्सव
सितंबर:बुरहानपुर में केला महोत्सव
अक्टूबर:इंदौर में सब्जी महोत्सव
नवंबर:ग्वालियर में अमरूद महोत्सव
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने संतरा महोत्सव के आयोजन के निर्देश भी दिए। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ फल, फूल, सब्जी, मसाला, औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
मसाला और औषधीय फसलों की अंतरराष्ट्रीय मांग
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की उद्यानिकी और मसाला फसलों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन फसलों की ब्रांडिंग और सप्लाई चेन मजबूत करके वैश्विक बाजार में एमपी उत्पादों की पैठ बनाई जा सकती है। प्रदेश में औषधीय फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है, जो देसी आयुर्वेदिक दवाइयों के निर्माण में इस्तेमाल होता है।
फूलों की खेती और सिंहस्थ-2028
सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में सेंटर फार एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। इसके लिए उज्जैन के पास 19 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। फूलों की खेती को प्रोत्साहित करने और बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में हार्टिकल्चर प्रमोशन एजेंसी की स्थापना की प्रक्रिया जारी है।
MSP और जीआई टैग
उद्यानिकी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग की प्रक्रिया भी चल रही है। बैठक में सामाजिक न्याय, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।