नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.27 पर पहुंच गया। 30 अप्रैल को बाजार खुलते ही रुपये में कमजोरी देखने को मिली और यह 95 के स्तर से नीचे फिसल गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है।
खुलते ही टूटा रुपया, नया लो बनाया
गुरुवार को रुपया 95.02 प्रति डॉलर पर खुला, जो पिछले बंद भाव 94.84 से करीब 0.2% कमजोर था। कारोबार के दौरान यह और गिरकर 95.27 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो मार्च में बने 95.22 के पिछले लो से भी नीचे है।
क्यों गिर रहा है रुपया?
रुपये में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं:
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
Brent Crude Oil 122 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जबकि West Texas Intermediate भी 110 डॉलर के आसपास बना हुआ है।
भारत तेल का बड़ा आयातक है, ऐसे में महंगा तेल = ज्यादा डॉलर की जरूरत = कमजोर रुपया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार से पैसा निकल रहा है।
RBI की सीमित भूमिका
Reserve Bank of India रुपये को संभालने के लिए हस्तक्षेप कर रहा है, लेकिन ग्लोबल दबाव के चलते असर सीमित नजर आ रहा है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
विदेश में पढ़ाई और यात्रा करना महंगा हो जाएगा
स्मार्टफोन, लैपटॉप जैसे आयातित सामान महंगे होंगे
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका
महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है