जोधपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट, भारत की कूटनीति, किसानों के हित, जल प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार की रणनीति का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब युद्ध के कारण दुनिया में ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई और कई देशों के लिए आयात के रास्ते लगभग बंद हो गए, तब भारत के दूसरे देशों के साथ मजबूत संबंध देश के लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने समय रहते अपनी ऊर्जा आयात नीति में बदलाव किया, नए देशों के साथ साझेदारी बढ़ाई और घरेलू स्तर पर भी कई अहम फैसले लेकर नागरिकों को संकट से बचाया।
'आयात के रास्ते बंद हुए, लेकिन भारत में नहीं आया ईंधन संकट'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक संघर्ष के दौरान कई देशों में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत हो गई थी। कई जगहों पर ईंधन को राशनिंग के आधार पर दिया जाने लगा और कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई। इसके बावजूद भारत में ऐसा कोई संकट नहीं आया। उन्होंने कहा कि सरकार ने समय रहते आवश्यक कदम उठाए, जिससे देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रही और आम लोगों को बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस दौरान तेल विपणन कंपनियों को अकेले पेट्रोल और डीजल पर 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई सरकार ने की। साथ ही जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी भी कम की गई।
'भारत की कूटनीति ने संकट में दिखाई अपनी ताकत'
प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध से पहले भारत करीब 25-26 देशों से ईंधन आयात करता था, लेकिन संकट के दौरान यह संख्या बढ़ाकर 40 से 50 देशों तक कर दी गई। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत रिश्तों ने कठिन समय में देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश के नागरिक सर्वोपरि हैं और सरकार हर परिस्थिति में उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की विश्वसनीयता और मित्रता का लाभ इस चुनौतीपूर्ण दौर में स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
'किसानों को 300 रुपये में यूरिया उपलब्ध कराया'
प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के हितों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक संकट के दौरान एक बोरी यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमत 3,000 रुपये से अधिक पहुंच गई थी। इसके बावजूद भारत सरकार ने किसानों को मात्र 300 रुपये प्रति बोरी की दर से यूरिया उपलब्ध कराया।उन्होंने कहा कि किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार ने लाखों करोड़ रुपये की सब्सिडी दी और खाद की उपलब्धता बनाए रखी, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ।
एलपीजी और पीएनजी सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाए गए बड़े कदम
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आवश्यकता खाड़ी देशों से पूरी होती है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। युद्ध के दौरान जब आपूर्ति प्रभावित होने लगी तो सरकार ने तत्काल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि केवल 90 दिनों के भीतर देश में एलपीजी उत्पादन में 54 हजार मीट्रिक टन की वृद्धि की गई। इसके साथ ही पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्तार करते हुए 11 लाख से अधिक घरों को पाइप्ड नेचुरल गैस से जोड़ा गया। प्रधानमंत्री ने बताया कि आज भी एलपीजी सिलेंडर 950 रुपये से कम कीमत पर उपलब्ध है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 650 रुपये से भी कम कीमत पर गैस सिलेंडर दिया जा रहा है।
राजस्थान और गुजरात के जल प्रबंधन का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण और राज्यों के बीच सहयोग का उदाहरण देते हुए राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री Vasundhara Raje का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री थीं, तब दोनों राज्यों ने जल संकट के समाधान के लिए मिलकर काम किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि गुजरात ने नर्मदा का पानी राजस्थान तक पहुंचाने में सहयोग किया। इसी तरह हरियाणा और राजस्थान के बीच भी जल समझौते हुए हैं, जिससे भविष्य में राजस्थान के जल संकट को काफी हद तक दूर करने में मदद मिलेगी।