मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भाजपा कांग्रेस जहां ऐड़ी चोटी का दम लगा रही हैं तो वही तीसरे मोर्चे के दलों ने दोनों ही पार्टियों की मुसीबत बढ़ा दी है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी में है पार्टी ने पहले चरण में अपने प्रभाव वाली 33 विधानसभा सीटों को चिन्हित कर लिया है, यहां पर सर्वे का काम भी पूरा हो गया है। पार्टी का दावा है कि वह 50 सीटों पर इंडिपेंडेंट चुनाव लड़ेगी वहीं अन्य सीटों पर तीसरे मोर्चे के सहयोगी दलों के साथ किला लड़ाने की तैयारी में है। वही आप पार्टी भी 230 सीटो पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। मध्य प्रदेश में यह नए सियासी दल भाजपा और कांग्रेस के समीकरणों को चुनावों में खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मप्र की जनता तीसरे मोर्चे को देगी मौका: AIMIM
एआईएमआईएम के नेता पीर तौकीर निजामी का कहना है कि कांग्रेस को वोट देने का मतलब है सीधे भाजपा को वोट देना क्योंकि कांग्रेस के लोग भाजपा में शामिल हो जाते हैं। एआईएमआईएम ने दावा किया कि मध्य प्रदेश की जनता ने साफ कर दिया है कि वह तीसरे मोर्चे को मौका देगी। इतना ही नहीं मध्यप्रदेश में अपनी पैठ जमाने के लिए पार्टी ने ओवैसी निशुल्क निकाह योजना की शुरुआत कर दी है। जिसके पहले चरण में 100 जोड़ों का निकाह कराया जाएगा जो मध्यम वर्ग या फिर निम्न मध्यम वर्ग श्रेणी से आते हैं, निकाह के साथ पार्टी की ओर से शादी में आने वाले मेहमानों को दावत भी दी जाएगी।
कांग्रेस ने की जिन्ना से तुलना
चुनावी दल में हर मोर्चे से भिड़ने की रणनीति बनाने में जुटी कांग्रेस ने ओवैसी की पार्टी को जिन्ना से तुलना की है। मप्र कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता का कहना है की आज़ादी के समय जब आंदोलन चल रहा था तब जिन्ना संघ और अंग्रेजों के लिए मदद कर रहे है।आज अभी कई लोग पीछे के दरवाज़े से भाजपा की मदद कर रहे है। साम्प्रदायिक राजनीति के ध्रुवीकरण में मदद कर रहे है। इनकी मदद के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने देश को आज़ाद कराया है। कर्नाटक में भी ओवैसी पार्टी गई थी 30 सीटों पर भाजपा की जमानत जब्त हुई है। ओवैसी की पार्टी से कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
तीसरे मोर्चे से कांग्रेस के पेट में दर्द: भाजपा
वहीं भाजपा तीसरे मोर्चे को चुनौती न मानते हुए कांग्रेस के पेट में दर्द बता रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि मप्र में सभी को चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता है लेकिन कांग्रेस के पेट मे दर्द क्यों हो रहा है। कांग्रेस भाजपा को दोष देने से अच्छा अवलोकन करें उनमें क्या कमी है। हम विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे है। जनता की कृपया बीजेपी को मिलेगी।
गौरतलब है की मध्य प्रदेश में चुनावी दलों के साथ सामाजिक संगठन भी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सक्रिय हो गए हैं। सामाजिक संगठनों के कार्यक्रम में लगातार भाजपा कांग्रेस दोनों ही दलों के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं और उनकी बातों को सुन रहे हैं और साथ ही आश्वासन भी देने का काम कर रहे हैं। बहरहाल देखना होगा कि तीसरे मोर्चे और अलग-अलग सामाजिक संगठनों की प्रेशर पॉलिटिक्स को भाजपा कांग्रेस कैसे डील करते हुए चुनावों में जीत का फार्मूला निकाल पाती है।
Written By:Shoaib Khan
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