उमा भारती ने OBC नेताओं के साथ किया विचार-विमर्श
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट X पर लिखा है कि, "आज राज्यसभा में भी महिला आरक्षण बिल पूर्ण बहुमत से पारित हो गया। अब पिछड़े वर्गों को स्थान देने के लिए एक और संशोधन का मार्ग निकालना है। इसलिए भोपाल शहर के एवं उसके आसपास के पिछड़े वर्ग के प्रमुख नेताओं के साथ विचार विमर्श हुआ।आज राज्यसभा में भी महिला आरक्षण बिल पूर्ण बहुमत से पारित हो गया।अब यदि पिछड़े वर्गों को स्थान देने के लिए एक और संशोधन का मार्ग निकालना है इसलिए भोपाल शहर के एवं उसके आसपास के पिछड़े वर्ग के प्रमुख नेताओं के साथ विचार विमर्श हुआ।
— Uma Bharti (@umasribharti) September 21, 2023
23 सितंबर को एक और बड़ी बैठक बुलाने का फैसला हुआ। pic.twitter.com/jYp3iwd4lC
OBC आरक्षण के बिना ही पारित हुआ महिला आरक्षण बिल
इसके पहले बुधवार को लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल पारित होने के बाद उमा भारती ने निराशा जाहिर करते हुए लिखा था कि, "कल लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया। 27 साल पहले यह विधेयक सर्वानुमति से पारित होने के लिए प्रस्तुत हुआ था तब हमारी पार्टी बीजेपी, काग्रेस एवं वामपंथी एकमत थे। देवेगौड़ा जी द्वारा सदन में पेश करते समय ही यह विधेयक ओबीसी, एससी, एसटी आरक्षण की दलील पर स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया। कल तक यह लंबित रहा। जिस ओबीसी आरक्षण के वजह से यह विधेयक रुका रहा उसके बिना ही यह पारित हो गया।"
उन्होंने आगे लिखा कि, "हमारी पार्टी की सरकार ने इसको जिस भी रूप में पारित किया वह आज स्वीकार है किंतु पार्टी की मर्यादा में रह कर लोकतांत्रिक तरीके से जब तक यह विधेयक लागू नहीं होता तब तक ओबीसी आरक्षण के संशोधन के लिए दृढ़निश्चयी बने रहेंगे। यह आरक्षण संविधान में विशेष संशोधन हैं तो देश की 60% आबादी ओबीसी के लिए एक संशोधन और किया जा सकता है। हम सभी अपनी तपस्या एवं मोदी जी पर अपना विश्वास बनाये रखे।"
महिला आरक्षण बिल को लेकर मुश्किलें बढ़ा सकती हैं Uma Bharti
माना जा रहा है कि बीजेपी कि फायर ब्रांड नेता उमा भारती इस मसले पर पार्टी के लिए आगे मुश्किलें खड़ी कर सकती है। पार्टी ने जैसे ही महिलाओं को 33% आरक्षण का बिल लोकसभा में रखा था, वैसे ही उमा भारती ने इसमें ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग शुरू कर दी थी। इसके लिए वे मीडिया में लगातार मुखर होकर बयान भी दे रही थी। हालांकि, अभी पार्टी ने उमा भारती के बयानों पर कान नहीं दिया है लेकिन चुनावी राजनीति के केनवास पर उनकी लंबे समय तक अनदेखी करने पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।Read More: मध्यप्रदेश के संविदाकर्मियों की समकक्षता निर्धारित, अब बढ़कर मिलेगा वेतन
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