धर्मनगरी हरिद्वार में वसंत पंचमी के पावन अवसर पर आस्था अपने चरम पर नजर आई। तड़के भोर से ही हर की पौड़ी के ब्रह्मकुंड समेत सभी प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे भक्तों ने विधि-विधान के साथ मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और सूर्य देव की उपासना की। इस दौरान गंगा घाट हर-हर गंगे के जयघोष से गूंज उठे।
पीले वस्त्र धारण कर पहुंचे श्रद्धालु
वसंत पंचमी की परंपरा के अनुसार श्रद्धालु बड़ी संख्या में पीले वस्त्र धारण कर गंगा घाटों पर पहुंचे जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवमय दिखाई दिया। सुबह से ही स्नान और पूजा-अर्चना का सिलसिला लगातार चलता रहा। श्रद्धालुओं ने मां गंगा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। तीर्थ पुरोहित शुभम् शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी के दिन गंगा स्नान करने से मन की शुद्धि होती है और नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है। शास्त्रों में भी इस दिन किया गया स्नान, दान और पूजा को विशेष पुण्यदायी माना गया है। यही कारण है कि बसंत पंचमी पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की संख्या में विशेष वृद्धि देखने को मिलती है। आस्था, परंपरा और श्रद्धा के इस पावन संगम से हर की पौड़ी पूरी तरह भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। दिनभर गंगा घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ का माहौल बना रहा, जिससे धर्मनगरी हरिद्वार एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दी।
वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है। इस दिन को अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह तिथि सर्वसिद्ध योग और अबूझ मुहूर्त के अंतर्गत आती है। इस कारण इस दिन विवाह, विद्यारंभ, गृह प्रवेश, यज्ञ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। प्रातःकाल गंगा स्नान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व माना गया है, वहीं दिनभर पूजा-पाठ और शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
वसंत पंचमी की पूजा विधि
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, यदि संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र जल में स्नान करें।
स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल पर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
मां सरस्वती को पीले फूल, पीला वस्त्र, केसर, अक्षत, फल और मिष्ठान अर्पित करें।
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
इस दिन विद्या, संगीत और कला से जुड़े उपकरणों की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
वसंत पंचमी का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व
वसंत पंचमी को ऋतु परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे ज्ञान, बुद्धि और विद्या की आराधना का पर्व कहा जाता है। गंगा स्नान से मन और आत्मा की शुद्धि होती है, जबकि दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यही कारण है कि धर्मनगरी हरिद्वार सहित देशभर के तीर्थ स्थलों पर इस दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
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