ईरान-इजराइल-अमेरिका की वर्तमान जंग के कारण वैश्विक तेल संकट गहरा गया है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। इसी बीच, अमेरिका ने दुनियाभर के देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है। सबसे पहले यह छूट भारत को दी गई थी।
रूस से तेल खरीद पर छूट
अमेरिका की तरफ से जारी इस अस्थायी छूट के तहत सभी देश एक निर्धारित सीमा में रूस से तेल खरीद सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रूसी तेल की खरीदी सीमित मात्रा में ही की जाएगी। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर युद्ध का प्रभाव
अमेरिका का यह फैसला उस समय आया जब ईरान और इजराइल के बीच जंग के चलते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया। यह जलडमरूमध्य दुनिया के तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा लेकर गुजरता है। हाल ही में यहां कई जहाजों पर हमले हुए थे, जिसके कारण समुद्री रास्ते पर भारी रुकावटें आईं और देश अपने जहाजों को निकालने से हिचकिचा रहे थे।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का बयान
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को बताया कि उसने एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है। यह लाइसेंस रूस के उस कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति देता है, जो 12 मार्च तक जहाजों पर पहले ही लादे गए थे। यह लाइसेंस 11 अप्रैल तक वैध रहेगा। इसका मतलब है कि दुनियाभर के देश अगले महीने 11 तारीख तक रूस से तेल खरीद सकते हैं।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर
अमेरिका की इस अस्थायी छूट से दुनिया के विभिन्न समुद्री इलाकों में फंसे लगभग 124.125 मिलियन बैरल रूसी तेल तक देशों की पहुंच संभव हो सकेगी। इससे खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग रास्तों में आई रुकावट के कारण तेल की सप्लाई में आई कमी को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत को मिली पहली छूट
इससे पहले 5 मार्च को अमेरिका ने 30 दिन की छूट देकर भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल के कार्गो खरीदने की अनुमति दी थी। इस निर्णय से मौजूदा संकट के दौरान देशों को तेल की सप्लाई बनाए रखने में थोड़ी राहत मिली। इसके पहले, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए थे कि उनकी टीम तेल संकट कम करने के लिए काम कर रही है।
Comments (0)