मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फीट की प्रतिमा का अनावरण 21 सितंबर यानी आज होगा। ये कार्यक्रम दो हिस्सों में आयोजित किया जाएगा। मांधाता पर्वत पर सुबह 10.30 बजे से कार्यक्रम शुरू होगा। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत देश के प्रमुख साधु संत मौजूद रहेंगे। सुबह 11 बजे केरल की पारंपरिक पद्धति से मुख्यमंत्री व संतों का स्वागत होगा। दोपहर 12 बजे प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। इसके साथ ही अद्वैत लोक का भूमि और शिला पूजन होगा। मांधाता पर्वत पर प्रतिमा का अनावरण होने और अद्वैत लोक की आधारशिला रखे जाने के बाद दोपहर 2.15 बजे से सिद्धवरकूट में ब्रह्मोत्सव का कार्यक्रम होगा। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही संत समागम भी रहेगा। सिद्धवरकूट में पद्मभूषण डॉ. पदमा सुब्रमण्यम द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी।
केरल की पारंपरिक पद्धति से स्वागत करेंगे
आचार्य शंकर के जीवन पर आधारित संग्रहालय अद्वैत लोक और अद्वैत वेदांत दर्शन के अध्ययन व शोध के लिए आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की होगी स्थापना। इस ऐतिहासिक पल में 5000 संत मनीषी और विशिष्ट जन बनेंगे साक्षी। 101 बटुक वेदोच्चार एवं शंखनाद करेंगे। सभी साधु संतों का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केरल की पारंपरिक पद्धति से स्वागत करेंगे। वैदिक यज्ञ होगा और शैव परंपरा के नृत्यों की प्रस्तुति दी जाएगी। सीएम शिवराज सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अवलोकन करते हुए अन्नपूर्णा (भोजन प्रसदीय) स्थल पहुंचेंगे। भोजन प्रसादी का वितरण होगा, सीएम शिवराज मूर्ति स्थल से ब्रह्मोत्सव पहुंचेंगे। सिद्धवरकूट पर शिवोहम, एकाग्र समवेत नृत्य होगा। एकात्मता यात्रा फिल्म का प्रदर्शन, शंकर संगीत, शांति पाठ और संत विमर्श होगा। तक्षशिला जैसा होगा 800 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान।हमारे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक तारीख
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 21 सितम्बर की तारीख हमारे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक तारीख होगी। आदि गुरू शंकराचार्य की ज्ञान भूमि ओंकारेश्वर में उनकी दिव्य-प्रतिमा के अनावरण के साथ-साथ एकात्म धाम का शिलान्यास भी किया जाएगा।सीएम शिवराज चौहान ने इंदौर में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि आदि गुरू शंकराचार्य महाराज ने सांस्कृतिक रूप से देश को जोड़ने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य की जन्म स्थली केरल थी, लेकिन उन्होंने जंगलों, पहाड़ों से यात्रा करते हुए ओंकारेश्वर में ज्ञान प्राप्त किया। यहां से ज्ञान प्राप्त कर वे काशी की ओर आगे बढ़े। उनके अद्वैत वेदांत के कारण भारत एक है। आदि शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार मठों की स्थापना की। मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि स्वामी विवेकानंद, स्वामी रामतीर्थ, तुलसी दास और कबीर दास जी सहित प्रमुख संतों ने आदि गुरू शंकराचार्य के अद्वैत ज्ञान को अपनाया है। आने वाली पीढ़ियों को भी अद्वैत ज्ञान मिलता रहे, इसी उद्देश्य से उनकी स्मृति में एकात्म धाम बनाने जा रहे हैं।Read More: विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने की तैयारियां तेज, कमलनाथ के आज से शुरू होंगे दौरे
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