आज कल बच्चे बस्ते के बोझ से झुकते नजर आ रहे हैं। इसलिए मप्र में अब बच्चों को दिए जाने वाले होमवर्क का बोझ खत्म किया जाएगा। इससे बस्ते का बोझ कम होगा। वहीं अब मप्र में वार्षिक परीक्षा के बदले गतिविधियों पर सतत मूल्यांकन होगा। इससे रटने वाला ज्ञान खत्म होगा, बल्कि सीखने और सिखाने पर जोर दिया जाएगा। बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाएगा। यह बात स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मप्र मानव अधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर प्रशासन अकादमी में बुधवार को शिक्षा का अधिकार व मानव अधिकार विषय पर आयोजित कार्यशाला में कही।
आज कल बच्चे बस्ते के बोझ से झुकते नजर आ रहे हैं। इसलिए मप्र में अब बच्चों को दिए जाने वाले होमवर्क का बोझ खत्म किया जाएगा। इससे बस्ते का बोझ कम होगा। वहीं अब मप्र में वार्षिक परीक्षा के बदले गतिविधियों पर सतत मूल्यांकन होगा। इससे रटने वाला ज्ञान खत्म होगा, बल्कि सीखने और सिखाने पर जोर दिया जाएगा। बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाएगा। यह बात स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मप्र मानव अधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर प्रशासन अकादमी में बुधवार को शिक्षा का अधिकार व मानव अधिकार विषय पर आयोजित कार्यशाला में कही।