मऊगंज से भाजपा विधायक प्रदीप पटेल को लेकर सियासत गरमा गई है। विधायक पिछले करीब 40 दिनों से अपने विधानसभा क्षेत्र में नजर नहीं आए हैं। रीवा और मऊगंज स्थित उनके घरों पर भी ताला लगा हुआ है। क्षेत्र में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि विधायक अपने परिवार समेत भोपाल के घर में हैं। लेकिन उनका घर किस इलाके में ये उन्हें नहीं पता, हालांकि वो विधायक की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं
मूसा गैंग से धमकी का दावा
वहीं विधायक प्रदीप पटेल दावा कर रहे है कि उन्हें मूसा गैंग की ओर से जान से मारने की धमकी मिली है। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में उन पर 6 बार हमले हो चुके हैं। यही वजह है कि उन्होंने सुरक्षा के मद्देनजर खुद को भोपाल में सीमित कर लिया है।
एसपी बोले- ऐसी कोई गैंग नहीं
मामले में नया मोड़ तब आया जब मऊगंज एसपी दिलीप सोनी ने मूसा गैंग के अस्तित्व से ही इनकार कर दिया। एसपी का कहना है कि मूसा गैंग जैसा कुछ है ही नहीं। उन्होंने विधायक के लापता होने की बात को भी खारिज करते हुए कहा कि वे अवकाश पर हैं और इस संबंध में रीवा सांसद भी बयान दे चुके हैं।
फिर रोजनामचे में ‘मूसा गैंग’ का जिक्र क्यों?
अब सबसे बड़ा सवाल 29 जनवरी 2025 की रात से जुड़ा है। तत्कालीन टीआई सनत द्विवेदी ने रात 1:05 बजे रोजनामचे में दर्ज किया कि विपिन त्रिपाठी, आशुतोष तिवारी, संतोष तिवारी, लालू पांडेय, अशोक चौरसिया समेत 40-50 लोग रात 10:30 बजे उनके चैंबर में घुस आए। उन्हें भ्रष्ट कहा, थाने से हटवाने की धमकी दी और अश्लील शब्द कहे। टीआई ने लिखा कि थाने में बल कम था, इसलिए जवाब नहीं दिया। वे मारपीट पर उतारू थे। लोगों में चर्चा है कि वे मूसा गैंग के हैं। परिवार के साथ अकेला रहता हूं। कभी भी मेरे साथ कोई दुर्घटना या हत्या करवा सकते हैं।
टीआई पर कार्रवाई, गैंग पर नहीं?
हैरानी की बात यह है कि इस रोजनामचे के बाद कथित गैंग पर कार्रवाई के बजाय टीआई को हटा दिया गया और उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी गई। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि गैंग अस्तित्व में नहीं है, तो रोजनामचे में उसका जिक्र क्यों हुआ? और अगर था, तो कार्रवाई किस पर होनी चाहिए थी?
विधायक का बड़ा आरोप- एसपी खुद खौफ खाते हैं
वहीं विधायक प्रदीप पटेल का कहना है कि मूसा गैंग ने जान से मारने की धमकी दी है। मुझ पर 6 बार हमले हो चुके हैं।”जब उनसे पूछा गया कि एसपी तो गैंग के अस्तित्व से इनकार कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “एसपी खुद इस गैंग से खौफ खाते हैं, इसलिए संरक्षण देते हैं।”उन्होंने यह भी दावा किया कि डेढ़ साल पहले उनकी बहन के घर में घुसकर बहन और बहनोई को बंधक बनाकर डकैती की गई थी, जिसका अब तक खुलासा नहीं हुआ।
सीनियर अफसरों को दी जानकारी
विधायक का कहना है कि घटना वाले दिन ही उन्होंने रीवा डीआईजी को फोन कर जानकारी दी थी। न्याय न मिलने पर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को भी अवगत कराया है,जब एसपी दिलीप सोनी से सवाल किया कि विधायक मूसा गैंग से जान को खतरा बता रहे हैं, तो उन्होंने साफ कहा, “यह बात गलत है, मूसा गैंग जैसा कुछ है ही नहीं।”जब पूछा गया कि फिर टीआई ने रोजनामचे में इसका जिक्र क्यों किया, तो एसपी का जवाब था, “गलत लिखा था, इसलिए उन पर कार्रवाई की गई।” फिलहाल विधायक भोपाल में हैं, सुरक्षा कड़ी है और सियासत गरम। लेकिन सच क्या है,यह जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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