लोकसभा के बजट सत्र में उस समय राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया जब सरकार ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। सदन में दिए उनके भाषण के कुछ हिस्सों ने सत्ता पक्ष को इतना आहत किया कि तत्काल नोटिस जारी कर उन्हें शाम 5 बजे तक जवाब देने का अल्टीमेटम जारी किया गया। सरकार का मानना है कि राहुल गांधी ने सदन की मर्यादा के विपरीत आरोप लगाए हैं जिनके समर्थन में उन्हें ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। इस राजनीतिक टकराव ने संसद में माहौल को अत्यधिक तीखा बना दिया है।
एप्स्टीन फाइल का जिक्र और प्रारंभिक विवाद
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में ‘एप्स्टीन फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि वे इससे जुड़े कुछ तथ्य रखना चाहते हैं, लेकिन जैसे ही आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने आपत्ति जताई, उन्होंने कहा कि वे नाम नहीं लेंगे। बावजूद इसके, इस संदर्भ ने विवाद की नींव रख दी और सत्ता पक्ष ने इसे गैर-जरूरी तथा भ्रामक संदर्भ बताया। उनके अनुसार, इस मामले को सदन में उठाना गंभीर संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है क्योंकि यह न केवल संवेदनशील है बल्कि अपूर्ण तथ्यों पर आधारित प्रतीत होता है।
अडानी समूह पर आरोप और बजट पर प्रभाव का दावा
राहुल गांधी ने अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के बजट में अडानी का प्रभाव स्पष्ट नजर आता है और अमेरिका में अडानी के खिलाफ दर्ज मुकदमा भी प्रधानमंत्री को निशाना बनाने की अप्रत्यक्ष कोशिश है। राहुल गांधी ने कहा कि इस मुकदमे का उद्देश्य भारतीय राजनीतिक संरचना को कमजोर करना है। उन्होंने अमेरिका द्वारा बीजेपी के कथित वित्तीय नेटवर्क को निशाने पर लेने का भी दावा किया। इसके साथ ही उन्होंने उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम जोड़ते हुए कहा कि एप्स्टीन फाइल में उनके नाम के कारण ही उन्हें जेल नहीं भेजा गया है। इन बयानों से सदन में हंगामा तेज हो गया और सत्ता पक्ष ने उन्हें तथ्यहीन, भ्रम फैलाने वाला और राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया।
केंद्रीय मंत्रियों पर सवाल और सत्ता पक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी अपने आरोपों के घेरे में शामिल करते हुए पूछा कि उन्हें एप्स्टीन से किसने मिलवाया। यह सवाल भी सत्ता पक्ष को बेहद आपत्तिजनक लगा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी निंदा करते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी करने की जानकारी दी। सरकार का तर्क है कि इस तरह के आरोप बिना प्रमाण के लगाए जाना संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है। बीजेपी प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है और यहां पेश किए जाने वाले आरोपों का न केवल तथ्यात्मक होना आवश्यक है बल्कि उनकी विश्वसनीयता भी स्पष्ट होनी चाहिए।
हरदीप सिंह पुरी का पलटवार और आरोपों का खंडन
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें आधारहीन, भ्रामक और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में दो तरह के नेता होते हैं—वे जो देश निर्माण में सक्रिय योगदान देते हैं और वे जो कभी-कभी संसद में आते हैं और बिना जिम्मेदारी लिए आरोप लगाकर चले जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एप्स्टीन से उनका सीमित संपर्क एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुआ था और ईमेल आदान-प्रदान केवल आधिकारिक विषयों जैसे ‘मेक इन इंडिया’ तक सीमित था। पुरी ने कहा कि एप्स्टीन ने स्वयं उन्हें ‘दोमुंहा’ कहा था और उनका उससे कोई वैचारिक या व्यक्तिगत संबंध नहीं था। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे तथ्य स्पष्ट रूप से समझें और ईमेल पढ़कर आरोप लगाएं।
Comments (0)