कोलकाता: कोलकाता विश्वविद्यालय में स्नातक पाठ्यक्रमों की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। परीक्षा में आंतरिक मूल्यांकन की भूमिका, प्रश्नपत्रों के प्रारूप और अंकों की गणना से जुड़े नए प्रावधानों के कारण विद्यार्थियों के मन में कई सवाल हैं। ऐसे में छात्रों की नजर विश्वविद्यालय की ओर से जारी होने वाले दिशा-निर्देशों पर टिकी है।
विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्नातक स्तर पर मूल्यांकन व्यवस्था में बदलाव की दिशा में कदम उठाए हैं। नए प्रावधानों के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रमों में ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने और उपस्थिति के लिए अंक निर्धारित करने का फैसला किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के प्रदर्शन का आकलन केवल लिखित परीक्षा के अंकों तक सीमित रखने के बजाय मूल्यांकन के दूसरे पहलुओं को भी शामिल करना है।
आंतरिक मूल्यांकन को भी मिलेगी अहमियत
स्नातक पाठ्यक्रमों में आंतरिक मूल्यांकन को शामिल करना इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत सेमेस्टर के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। सितंबर में सामने आई जानकारी के अनुसार, आंतरिक मूल्यांकन के लिए कुल अंकों का 25 प्रतिशत निर्धारित करने की योजना पर चर्चा हुई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने अक्टूबर में संबंधित परीक्षा नियमों में संशोधन से जुड़े नोटिस जारी किए।
इस व्यवस्था में कॉलेज स्तर पर होने वाले मूल्यांकन की भूमिका बढ़ सकती है। नियमित कक्षाओं में भागीदारी और पूरे सेमेस्टर के दौरान पढ़ाई पर ध्यान देने वाले विद्यार्थियों के प्रदर्शन को भी महत्व देने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, छात्रों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनके पाठ्यक्रम और प्रवेश सत्र के अनुसार कौन-से प्रावधान लागू होंगे।
ग्रेडिंग और अंकों की गणना में बदलाव
विश्वविद्यालय के नए नियमों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रमों के प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों के लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत परीक्षा में प्राप्त अंकों को ग्रेड पॉइंट में बदलने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। उपस्थिति के लिए अंक देने का प्रावधान भी नई व्यवस्था का हिस्सा है।
इन बदलावों के बीच विद्यार्थियों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लिखित परीक्षा, आंतरिक मूल्यांकन और उपस्थिति के अंकों का अंतिम परिणाम पर किस तरह प्रभाव पड़ेगा। विश्वविद्यालय के संशोधित नियमों और संबंधित पाठ्यक्रम की अधिसूचना के आधार पर ही इसकी सही जानकारी मिल सकेगी।
प्रश्नपत्र के प्रारूप को लेकर भी सवाल
परीक्षा पद्धति में बदलाव की चर्चा के बीच प्रश्नपत्रों के प्रारूप को लेकर भी विद्यार्थियों की जिज्ञासा बनी हुई है। छात्रों के लिए यह जानना जरूरी है कि प्रश्नों के प्रकार, परीक्षा की संरचना और मूल्यांकन की प्रक्रिया में उनके संबंधित पाठ्यक्रम के लिए क्या बदलाव किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं से सभी विषयों में प्रश्नपत्रों का एक समान नया प्रारूप लागू होने की पुष्टि नहीं होती है।
विश्वविद्यालय की परीक्षा संबंधी अधिसूचनाओं में अलग-अलग पाठ्यक्रमों और सेमेस्टर के लिए नियम दिए गए हैं। इसलिए विद्यार्थियों को पुराने प्रश्नपत्रों या अनौपचारिक सूचनाओं के आधार पर परीक्षा की तैयारी करने के बजाय अपने विषय और सेमेस्टर से संबंधित नवीनतम निर्देशों को देखना चाहिए।
छात्रों के लिए क्या है जरूरी?
कोलकाता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अपने पाठ्यक्रम, प्रवेश सत्र और सेमेस्टर के अनुसार लागू परीक्षा नियमों की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। खास तौर पर आंतरिक मूल्यांकन, उपस्थिति के अंक, ग्रेड पॉइंट की गणना और लिखित परीक्षा के नियमों से संबंधित आधिकारिक अधिसूचनाओं को ध्यान से पढ़ना उपयोगी होगा।
विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा नियमों और संशोधनों से जुड़ी सूचनाएं उपलब्ध हैं। परीक्षा पद्धति और प्रश्नपत्र के प्रारूप को लेकर किसी भी भ्रम से बचने के लिए विद्यार्थियों को संबंधित कॉलेज और विश्वविद्यालय की आधिकारिक घोषणा पर ही भरोसा करना चाहिए।