पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक सशक्त और स्पष्ट संदेश दिया है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन की तत्काल बहाली की मांग की है। यह अपील केवल रणनीतिक या व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों नाविकों की सुरक्षा से जुड़ी है जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ माने जाते हैं।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता
भारत ने स्पष्ट किया कि हाल के समय में समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमलों से निर्दोष नाविकों की जान को खतरा उत्पन्न हुआ है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत ने जोर देकर कहा कि समुद्र में कार्यरत ये नागरिक किसी संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था को चलाने वाले आवश्यक कर्मी हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही होती है। भारत ने चेतावनी दी कि इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा या बंदी का सीधा प्रभाव न केवल ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है। भारत ने इस मार्ग को खुला और सुरक्षित बनाए रखने की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि का बयान
संयुक्त राष्ट्र में भारत की राजदूत योजना पटेल ने इस मुद्दे पर देश का पक्ष रखते हुए कहा कि समुद्री मार्ग केवल व्यापार के रास्ते नहीं हैं, बल्कि वैश्विक समृद्धि के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने हाल की घटनाओं में भारतीय नाविकों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्वतंत्र और खुले समुद्री मार्गों की रक्षा अनिवार्य है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला पर असर
भारत ने यह भी रेखांकित किया कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो लगभग 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे न केवल व्यापार प्रभावित हुआ है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और मानवीय आपूर्ति श्रृंखला भी संकट में आ गई है। भारत ने कहा कि यह स्थिति पूरे विश्व के लिए चेतावनी है और इसे तुरंत सामान्य करने की आवश्यकता है।
भारत की वैश्विक भूमिका और जिम्मेदारी
भारत दुनिया के शीर्ष तीन नाविक आपूर्ति करने वाले देशों में शामिल है और वैश्विक समुद्री कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा भारतीय नाविकों पर आधारित है। ऐसे में भारत की यह चिंता केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि समुद्र में कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और संघर्षों का असर उन पर न पड़ने दिया जाए।