मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की राजनीति में उस वक्त अचानक भूचाल आ गया, जब कांग्रेस के कद्दावर और चर्चित नेता भरत मिलन पांडे को जबलपुर से पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। बिना आधिकारिक पुष्टि के हुई इस कार्रवाई ने जहां कई सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं परिवार ने इसे सीधे तौर पर “राजनीतिक षड्यंत्र” करार दिया है। वन विभाग के एक मामले से जुड़ी इस गिरफ्तारी ने न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है, बल्कि आने वाले दिनों में पन्ना की सियासत का रुख बदलने के संकेत भी दे दिए हैं।
राजनीतिक बदले की कार्रवाई?”—परिवार का आरोप, कांग्रेस हमलावर
परिवार ने इस पूरी कार्रवाई को सीधे तौर पर “राजनीतिक षड्यंत्र” करार दिया है। पुत्र सचिन पांडे ने दावा किया कि उनके पिता इलाज के लिए जबलपुर गए थे, जहां से उन्हें अचानक हिरासत में लिया गया। उनका कहना है कि जिस मामले में गिरफ्तारी की बात सामने आ रही है, उसमें पहले उनका नाम शामिल नहीं था, लेकिन बाद में दबाव में जोड़ा गया।
वन विभाग केस बना बहाना या सख्त कानून? गिरफ्तारी पर उठे बड़े सवाल
बताया जा रहा है कि हाल ही में वन विभाग द्वारा जब्त किए गए पत्थरों से भरे ट्रैक्टर को छुड़ाने के मामले में अजयगढ़ थाने में केस दर्ज किया गया था। इसी मामले को आधार बनाकर पुलिस ने कार्रवाई की है। हालांकि, विपक्ष इसे कानून का पालन बता रहा है, वहीं कांग्रेस इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रही है। पहली बार गिरफ्तारी, बढ़ा सियासी तापमान भरत मिलन पांडे का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आता रहा है, लेकिन यह पहला मौका है जब पुलिस ने इतनी बड़ी कार्रवाई की है। उनके प्रदेश स्तर के नेताओं से संबंधों के चलते यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर पन्ना पहुंची, कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश देखा गया, जबकि विरोधी खेमे ने इसे “कानून का डर” बताया।
अब नजरें आगे की रणनीति पर
यह गिरफ्तारी आने वाले समय में पन्ना की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगी, यह बड़ा सवाल बन गया है। क्या कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सड़कों पर उतरेगी, या फिर यह मामला कानूनी दायरे में ही सिमट जाएगा—इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।