मध्यप्रदेश में शिक्षकों को 1 से 31 मई तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग नजर आ रही है। अवकाश के दौरान भी शिक्षकों को अलग-अलग सरकारी कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे छुट्टियां केवल औपचारिक बनकर रह गई हैं।
विभागीय कार्यों का बढ़ता बोझ
शिक्षकों को जनगणना, ट्रेनिंग और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगातार लगाया जा रहा है। इससे उन्हें आराम का समय नहीं मिल पा रहा और अवकाश का उद्देश्य भी प्रभावित हो रहा है।
समर कैंप और ट्रेनिंग में अनिवार्य भागीदारी
आनंद विभाग द्वारा मई माह में ही ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में समर कैंप का संचालन भी शिक्षकों की जिम्मेदारी बना हुआ है। चयनित शिक्षकों को निर्धारित तिथियों पर अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।
छुट्टियों में भी जारी ड्यूटी
समर कैंप के संचालन के अलावा कई शिक्षकों को जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी लगाया गया है। ऐसे में छुट्टियों के दौरान भी उनकी ड्यूटी लगातार बनी हुई है, जिससे उन्हें कोई वास्तविक राहत नहीं मिल रही।
शिक्षकों का कहना है कि पूरे साल के शैक्षणिक दबाव के बाद मई का महीना ही एकमात्र आराम का समय होता है, लेकिन इस बार विभिन्न जिम्मेदारियों के कारण यह भी छिनता नजर आ रहा है। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं और सरकार से राहत देने की मांग की है।
शिक्षकों पर बढ़ता कार्यभार और अवकाश के दौरान भी ड्यूटी की स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि इस व्यवस्था में संतुलन बनाया जाए, ताकि शिक्षकों को उनका अधिकारिक अवकाश वास्तव में मिल सके।