भोपाल/उज्जैन, 13 अगस्त 2026 | मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला किया है। राज्य शासन ने वरिष्ठ भाजपा नेता और उज्जैन विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल को सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने बुधवार, 12 अगस्त को इससे संबंधित आदेश जारी किया। प्राधिकरण का गठन मध्य भारत सिंहस्थ मेला अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत किया गया है। सरकार का उद्देश्य सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों, विभागीय व्यवस्थाओं और प्रशासनिक समन्वय को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाना है।
सिंहस्थ की तैयारियों में अहम होगी जगदीश अग्रवाल की भूमिका
सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में जगदीश अग्रवाल आयोजन से संबंधित योजनाओं, स्थानीय जरूरतों और शासन-प्रशासन के बीच समन्वय में भूमिका निभाएंगे। प्राधिकरण के गठन के बाद सिंहस्थ से जुड़े विषयों पर निर्णय और विभागीय संवाद अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
उज्जैन में इस समय सड़कों, घाटों, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, यातायात, पार्किंग, सुरक्षा, आवास और भीड़ प्रबंधन से जुड़े कई काम प्रस्तावित या निर्माणाधीन हैं। नए अध्यक्ष की नियुक्ति से इन परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा और स्थानीय स्तर के विषयों को शासन तक पहुंचाने की प्रक्रिया मजबूत होने की संभावना है। यह नियुक्ति से निकलने वाला प्रशासनिक आकलन है; प्राधिकरण के विस्तृत अधिकार और कार्यविभाजन संबंधित सरकारी आदेशों से स्पष्ट होंगे।
कौन हैं जगदीश अग्रवाल?
जगदीश अग्रवाल लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। वह भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में जिम्मेदारी निभा चुके हैं और उज्जैन भाजपा के नगर अध्यक्ष भी रहे हैं। अग्रवाल इससे पहले उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रह चुके हैं। स्थानीय संगठन और उज्जैन की विकास जरूरतों से जुड़े उनके अनुभव को सिंहस्थ की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आशीष सिंह के पास है प्रशासनिक तैयारियों की कमान
सिंहस्थ 2028 की प्रशासनिक तैयारियों की निगरानी फिलहाल उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह कर रहे हैं। उज्जैन जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट उन्हें उज्जैन संभाग का आयुक्त बताती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह सिंहस्थ मेला अधिकारी का अतिरिक्त दायित्व भी संभाल रहे हैं और विभिन्न विभागों के साथ नियमित समीक्षा तथा स्थल निरीक्षण कर रहे हैं।
जगदीश अग्रवाल की नियुक्ति के बाद राजनीतिक-नीतिगत और स्थानीय समन्वय के लिए प्राधिकरण का नेतृत्व अलग से उपलब्ध होगा, जबकि मेला अधिकारी और स्थानीय प्रशासन अधोसंरचना तथा मैदानी तैयारियों को आगे बढ़ाते रहेंगे।
कब से कब तक चलेगा सिंहस्थ 2028?
उज्जैन सिंहस्थ 2028 का वर्तमान आयोजन कार्यक्रम 27 मार्च से 27 मई 2028 तक निर्धारित बताया गया है। यानी महापर्व करीब दो महीने चलेगा। इस अवधि में शिप्रा नदी के घाटों पर प्रमुख स्नान पर्वों, अखाड़ों की पेशवाई, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
इस दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। वास्तविक स्नान समय, अखाड़ों का क्रम, यातायात योजना और मेला क्षेत्र में प्रवेश से जुड़ी अंतिम व्यवस्थाएं आयोजन के नजदीक अधिकृत अधिसूचनाओं के माध्यम से जारी होंगी।
इन व्यवस्थाओं पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
सिंहस्थ के लिए केवल अस्थायी मेला क्षेत्र तैयार नहीं किया जा रहा, बल्कि उज्जैन और आसपास दीर्घकालीन उपयोग वाली अधोसंरचना को भी मजबूत किया जा रहा है।
सरकार और प्रशासन का मुख्य ध्यान इन क्षेत्रों पर है:
- उज्जैन को इंदौर तथा दूसरे प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली सड़कों का विस्तार।
- शिप्रा नदी के घाटों का निर्माण, विस्तार और सुदृढ़ीकरण।
- पेयजल, सीवरेज और नदी की स्वच्छता।
- श्रद्धालुओं के लिए अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और आपात चिकित्सा सेवाएं।
- पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन और पैदल यात्री मार्ग।
- सीसीटीवी, कमांड सेंटर और तकनीक आधारित भीड़ प्रबंधन।
- साधु-संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी आवास।
- कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था।
सिंहस्थ के लिए तैयार बड़ी परियोजना योजना में सड़क, नदी पुनर्जीवन, शहरी सुविधाओं, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े व्यापक कार्य शामिल हैं।
प्राधिकरण के गठन से क्या बदलेगा?
सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में नगर निगम, विकास प्राधिकरण, लोक निर्माण, जल संसाधन, गृह, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा, पर्यटन और संस्कृति समेत कई विभागों की भूमिका होती है। मेला प्राधिकरण इन अलग-अलग व्यवस्थाओं को एक साझा आयोजन ढांचे से जोड़ने में मदद कर सकता है।
जगदीश अग्रवाल की नियुक्ति के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों, धार्मिक संगठनों, अखाड़ों और प्रशासन के बीच संवाद को भी अधिक नियमित किए जाने की उम्मीद है। हालांकि प्राधिकरण की बैठक, सदस्य संरचना और निर्णय लेने की विस्तृत प्रक्रिया की जानकारी आगे जारी होने वाले सरकारी आदेशों से सामने आएगी।
सिंहस्थ 2028 क्यों है बड़ी प्रशासनिक चुनौती?
सिंहस्थ के प्रमुख स्नान पर्वों पर एक ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। इस कारण रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, शहर की प्रमुख सड़कें, महाकाल मंदिर क्षेत्र और शिप्रा नदी के घाटों पर अत्यधिक दबाव बन सकता है। प्रशासन को सामान्य यातायात जारी रखते हुए श्रद्धालुओं के सुरक्षित आवागमन, स्नान, ठहरने, भोजन, पेयजल, चिकित्सा और आपात निकासी की व्यवस्था करनी होगी। सिंहस्थ के लिए प्रस्तावित सड़क और परिवहन परियोजनाओं का उद्देश्य उज्जैन के साथ इंदौर तथा आसपास के जिलों पर पड़ने वाले यातायात दबाव को कम करना भी है।