उज्जैन. देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार देर रात अचानक सुरक्षा बलों की गतिविधियां बढ़ गईं। यह किसी खतरे की चेतावनी नहीं बल्कि मंदिर की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए किया गया उच्च स्तरीय मॉक ड्रिल था। रात 11 बजे से सुबह 2 बजे तक चले इस अभ्यास में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी NSG स्थानीय पुलिस और प्रशासन शामिल रहे। ड्रिल का मुख्य उद्देश्य संभावित सुरक्षा खतरे से निपटने की तैयारी परखना था। विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
NSG कमांडो की मौजूदगी और उद्देश्य
मंदिर परिसर में NSG कमांडो मध्य प्रदेश एसटीएफ स्थानीय पुलिस और मंदिर प्रशासन ने संयुक्त रूप से सुरक्षा मॉक ड्रिल की। सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित आतंकी हमले आपदा या अन्य आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों का परीक्षण किया। इस दौरान महाकाल थाना महालोक थाना जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। अभ्यास का मकसद आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाना था। कमांडो ने विभिन्न परिदृश्यों का अभ्यास किया। पूरी ड्रिल गोपनीय माहौल में संपन्न हुई।
तीन घंटे चली संयुक्त ड्रिल
यह सुरक्षा अभ्यास रात 11 बजे शुरू होकर सुबह करीब 2 बजे तक चला। तीन घंटे के इस अभ्यास में सुरक्षा बलों ने मंदिर परिसर के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर अपनी तैयारियों का परीक्षण किया। संभावित घुसपैठ भीड़ नियंत्रण और आपात निकासी जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया। एजेंसियों के बीच तालमेल को परखने के लिए वास्तविक परिस्थितियों के समान माहौल बनाया गया। ड्रिल के दौरान मंदिर की दिनचर्या प्रभावित नहीं हुई क्योंकि यह देर रात किया गया। सुरक्षा बलों की सतर्कता चरम पर रही।
शामिल सुरक्षा बल और एजेंसियां
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यानी ASP ने बताया कि इस सुरक्षा अभ्यास में लगभग 100 NSG कमांडो और अन्य सुरक्षा बलों के जवान शामिल हुए। NSG के साथ मध्य प्रदेश एसटीएफ स्थानीय पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी एजेंसियों ने एकजुट होकर अभ्यास में भाग लिया। समन्वय की इस कवायद से भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया तेज होने की उम्मीद है। विभिन्न बलों के बीच संचार और सहयोग को भी परखा गया। यह अभ्यास बहु एजेंसी सहयोग का अच्छा उदाहरण बना।
मंदिर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है इसलिए इसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। लाखों श्रद्धालु साल भर यहां दर्शन करने आते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी हैं। ड्रिल का उद्देश्य सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और किसी भी खतरे की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। मंदिर प्रशासन भी सुरक्षा उपायों में सहयोग कर रहा है।
अभ्यास के लाभ और आगे की तैयारी
इस मॉक ड्रिल से सुरक्षा बलों को वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव मिला है। कमजोरियों को पहचाना गया और सुधार के उपाय तय किए गए। भविष्य में और ऐसे अभ्यास किए जा सकते हैं। महाकाल मंदिर की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ मंदिर परिसर की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। यह अभ्यास देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आगे भी नियमित निगरानी और अभ्यास जारी रहेंगे।