भोपाल | मध्य प्रदेश में नया मकान, दुकान या अन्य भवन निर्माण कराने वालों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार भवन निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन के साथ नजूल एनओसी (Nazul NOC) की प्रमाणित प्रति जमा करने की अनिवार्यता खत्म करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रस्तावित संशोधन पर आम लोगों से 15 दिनों के भीतर दावे-आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। हालांकि, अभी यह बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर है। अंतिम अधिसूचना जारी होने और संशोधन लागू होने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी।
15 दिन में दे सकेंगे दावे-आपत्तियां और सुझाव
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भवन निर्माण की अनुमति से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए मसौदा जारी किया है। इसमें आम नागरिकों और संबंधित पक्षों को प्रस्ताव पर अपनी राय देने का अवसर दिया गया है। निर्धारित अवधि में प्राप्त दावे-आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार संशोधन लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।
नक्शा पास कराने के लिए नहीं लगानी होगी नजूल NOC की प्रमाणित प्रति
प्रस्तावित बदलाव का सबसे बड़ा असर भवन निर्माण का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया पर पड़ेगा। फिलहाल मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के तहत निर्माण अनुमति के आवेदन के साथ नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति देना जरूरी है। यदि प्रस्तावित संशोधन लागू हो जाता है, तो आवेदन के साथ यह दस्तावेज लगाने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। इससे आवेदकों को दस्तावेज जुटाने और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
अभी निर्माण अनुमति के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 16 के उपनियम (11) के तहत भवन निर्माण की अनुमति के आवेदन के साथ भू-स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज देने होते हैं।
इनमें शामिल हैं:
- विक्रय विलेख या पट्टा विलेख: जमीन के स्वामित्व से संबंधित रजिस्ट्री या पट्टे का दस्तावेज।
- खसरा, नक्शा और खतौनी अभिलेख: भूमि से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड।
- नजूल NOC की प्रमाणित प्रति: मौजूदा नियम के तहत जरूरी दस्तावेज, जिसे हटाने का प्रस्ताव है।
- प्रस्तावित संशोधन लागू होने पर तीसरे दस्तावेज की अनिवार्यता समाप्त हो सकती है, जबकि पहले दो श्रेणियों के दस्तावेज देने होंगे।
नियम 16 के उपनियम (11) में क्या बदलाव होगा?
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, नियम 16 के उपनियम (11) के खंड (ग) को हटाने का प्रस्ताव है। इसी खंड में नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति जमा करने की अनिवार्यता शामिल है। वहीं, खंड (क) और खंड (ख) में बदलाव प्रस्तावित नहीं है। इसका अर्थ है कि संशोधन लागू होने के बाद भी आवेदकों को रजिस्ट्री या पट्टा विलेख और भूमि से संबंधित खसरा, नक्शा व खतौनी जैसे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
आम लोगों को क्या फायदा होगा?
प्रस्तावित बदलाव से मकान, दुकान और अन्य भवन बनवाने वालों के लिए निर्माण अनुमति की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति जुटाने की बाध्यता हटने से कागजी कार्रवाई कम हो सकती है और आवेदन प्रक्रिया में लगने वाला समय बच सकता है।